158. 15.10.1956 बौद्ध धर्म विश्व का उद्धारक होगा - Page 538

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कि दूसरे लोग आपका आदर-सम्मान करें। यह नहीं सोचिए कि इस धर्म का अर्थ यह है कि हम अपने गले में लाश बांधकर अकड़ जाएं। जहां तक बौद्ध धर्म का संबंध है भारत की धरती का कोई महत्व नहीं। हमें बौद्ध धर्म का पालन सबसे अच्छे ढंग से करने का संकल्प रखना चाहिए। यह नहीं होना चाहिए कि महार लागां ने बौद्ध धर्म को अपमानित किया। हमें दृढ़ संकल्प रखना चाहिए। अगर हम यह प्राप्त कर लेते हैं, तब हम अपने राष्ट्र ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में फले-फूलेंगे। क्योंकि विश्व को केवल बौद्ध धर्म ही मुक्ति दिलाएगा। जब तक न्याय नहीं है, विश्व में शांति नहीं होगी।

यह नया रास्ता उत्तरदायित्वों से भरा है। नौजवानों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि हमने कुछ संकल्प किए हैं और कुछ इच्छाएं प्रकट की हैं। उनको स्वार्थी आलसी नहीं बनना चाहिए। हमें यह तय करना चाहिए कि हम अपनी आय का कम से कम बीसवां हिस्सा उस उद्देश्य के लिए दें। मैं अपने साथ आप सबको लेना चाहता हूं। प्रारंभ में तथागत ने थोड़े-से लोगों को दीक्षा दी थी और उनको निर्देश दिया था, ‘‘उस धर्म का प्रसार करो।’’ उसके पश्चात् यश और उसके चालीस मित्रों ने बौद्ध धर्म ग्रहण किया था। यश धनी परिवार से था। भगवान बुद्ध ने उनसे कहा, ‘‘यह धर्म किस तरह का है? धर्म ‘‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय, लोकानुकम्पाय, धम्म आदि कल्यानम, मध्य कल्यानम्, पर्यावासन कल्यानम’’ है। तथागत ने अपने धर्म का प्रचार करने का मार्ग उस समय की परिस्थितियों के अनुसार तय किया था। अब हमें कार्यविधि तैयार करनी है। इस धर्मानुष्ठान के पश्चात् प्रत्येक को दीक्षा देनी है प्रत्येक को। मैं घोषणा करता हूं कि प्रत्येक बौद्ध को दीक्षा देने का अधिकार है।’’

बौद्धों और आमंत्रितों की तालियों के बीच डॉ. अम्बेडकर ने अपने भाषण को समाप्त किया।

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...खुशी के आंसू बह निकले

‘‘इस अवसर की शोभा बढ़ाने के लिए भारत के महाबोधि सोसाइटी के महामंत्री श्रद्धेय डी. वलीसिंहा को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। धर्मांतरण समारोह का उनका प्रत्यक्षदर्शी वृत्तांत उस उत्साह का प्रचुर प्रमाण है जो बौद्ध धर्म को अंगीकार करते समय बाबा साहेब के अनुयायियों ने प्रदर्शित किया था। इस

1 मराठी भाषण प्रबुद्ध भारत के अम्बेडकर दीक्षा विशेषांक, 27 अक्तूबर, 1956 में प्रकाशित हुआ था।

अंग्रेजी अनुवाद संपादकां का है। (फाउंडरेशन द्वारा हिंदी अनुवाद प्रस्तुत)