158. 15.10.1956 बौद्ध धर्म विश्व का उद्धारक होगा - Page 546

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और यह प्रश्न उनके धर्म (धम्म) के संबंध में पूछते हैं। वह क्या कहते हैं? बुद्ध का एक महानतम काम विश्व को यह बताना रहा है कि विश्व को लोगों की सोच को, विश्व की सोच को बदले बिना विश्व को सुधारा नहीं जा सकता है। अगर सोच बदल जाती है, अगर मस्तिष्क कम्युनिस्ट व्यवस्था स्वीकार कर लेता है और इससे निष्ठापूर्व प्राप्त करता तथा इसे लागू करता है, तब यह एक स्थायी चीज होगी। व्यक्ति को व्यवस्था में रखने के लिए इसे सिपाही या पुलिस अफसर की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्यों? उत्तर यह है बुद्ध ने अपनी चेतना को उर्जित कर दिया है जो आपको आपके मार्ग पर रखने के लिए प्रहरी के रूप में काम कर रहा है। जब आपका मस्तिष्क बदल जाता है तो कोई समस्या नहीं होती, चीच स्थायी बन जाती है।

कम्युनिस्ट व्यवस्था बल पर आधारित है। कल्पना करिए कि रूस में कल तानाशाही विफल हो जाती है, और हमें इसकी विफलता के संकेत दिखाई पड़ते हैं, तब क्या होगा? मैं सच को ही जानना चाहता हूं कि कम्युनिस्ट व्यवस्था का क्या होगा? मुझे यह दिखता है कि राज्य की संपत्ति को हड़पने के लिए रूसियों में खूनी जंग होगी। इसका यही परिणाम होगा। क्योंकि कम्युनिस्ट व्यवस्था को उन्होंने स्वेच्छा से स्वीकार नहीं किया है। वे इसका पालन कर रहे हैं। क्योंकि उनको फांसी पर चढ़ाए जाने का डर है। ऐसी व्यवस्था जड़ें नहीं जमा सकती हैं। इसलिए मैं मानता हूं कि जब कम्युनिस्ट इन प्रश्नों का उत्तर ही नहीं दे पाते, तो उनकी व्यवस्था का क्या होगा? जब बल गायब हो जाता है, तब उस पर काम करने का कोई लाभ नहीं। क्योंकि अगर मस्तिष्क आश्वस्त नहीं तो हमेशा बल की जरूरत होगी। और निष्कर्ष के तौर पर मैं यह कहना चाहता हूं कि बौद्ध धर्म की एक सबसे महान चीज यह है कि इसकी व्यवस्था जनतांत्रिक है। जब अजातशत्रु का प्रधानमंत्री बुद्ध से यह कहने गया कि अजातशत्रु वज्जियों पर विजय प्राप्त करना चाहता है, तब उन्होंने कहा कि राजा तब तक ऐसा नहीं कर पाएगा जब तक वज्जी अपनी युगों पुरानी व्यवस्था का पालन करते रहते हैं। कुछ अज्ञात कारणों से बुद्ध ने स्पष्ट शब्दों में नहीं बताया कि इसका अर्थ क्या है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि वह वज्जी सरकार के जनतांत्रिक और गणराज्य रूप की ओर इशारा कर रहे थे। उन्होंने कहा था जब तक वज्जी अपनी व्यवस्था का अनुसरण कर रहे हैं, वे अपराजेय रहेंगे। निस्संदेह बुद्ध एक महान जनवादी थे।

इसलिए मैं कहता हूं और यदि अध्यक्ष मुझे अनुमति दें, तो मैं कहना चाहूंगा कि मैं राजनीति का एक विद्यार्थी रहा हूं, मैं अर्थशास्त्र का विद्यार्थी रहा हूं और अर्थशास्त्र का प्रोफेसर था, और कार्ल मार्क्स तथा कम्युनिज्म का अध्ययन करने में बहुत समय लगाया है और बौद्ध धर्म के अध्यय में भी काफी समय लगाया है। इन