परिशिष्ट-I डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा धर्मांतरण की घोषणा पर गांधी जी का लेख। - Page 553

532 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हजारों हरिजनों के सामने सबसे बड़ी परेशानी पीने और घर के इस्तेमाल के लिए साफ पानी के अभाव की, सार्वजनिक स्कूलों तथा अन्य संस्थाओं में प्रवेश ने मिलने और गांवों में लगातार दुखी किए जाने के साथ-साथ अंत में उपासना के मंदिरों में घुसने से इनकार किए जाने को लेकर है। ये असमर्थताएं हरिजनों के विशाल बहुमत के जीवन की कठोर सच्चाइयां हैं। अगर वे हिंदू धर्म को समूह के तौर पर छोड़ते हैं, तो वे ऐसा उन आम असमर्थताओं के चलते करेंगे जो उन पर हिंदू समाज के कोडि़यों की छाप लगाती हैं। हिंदू धर्म एक भयंकर अग्नि परीक्षा से गुजर रहा है। इसका विनाश व्यक्तिगत धर्मांतरण से नहीं, सामाजिक धर्मांतरणां से भी नहीं, बलिक तथाकथित सवर्ण हिंदुओं के द्वारा हरिजनों को प्राथमिकता न्याय से अधर्मी रूप से वंचित रखने के कारण होगा। अतः धर्मांतरण की प्रत्येक धमकी सवर्णों के लिए एक चेतावनी है कि अगर वे समय रहते नहीं जागते तो बहुत देर हो जाएगी।

‘‘एक शब्द अधीर और अभावग्रस्त हरिजनों से। हिंदू संस्थाओं या व्यक्तियों से सहायक प्राप्त करने के लिए मिलते समय उनको धमकियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनको अपने मामले की शक्ति पर भरोसा करना चाहिए जो सुनवाई की मांग करता है। हरिजनों के बहुमत को यह नहीं पता कि धर्म परिवर्तन का क्या अर्थ हो सकता है? वे चुपचाप उस सतत अधोगति को झेलते रहते हैं जिसे अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए उन पर थोप दी गई है। वे चाहे शिकायत करें अथवा नहीं, हिंदू सुधारकों को उनका ध्यान रखना चाहिए। जो अधोगति को जानने तथा महसूस करने के लिए प्रबुद्ध और यह जानते हैं कि धर्म परिवर्तन का क्या अर्थ है, वे या तो बहुत भले हिंदू हैं जो अपने पूर्वजों के धर्म को छोड़ नहीं सकते हं और वे हर प्रकार की सहायता के योग्य हैं, या व हं जो धर्म के प्रति उदासीन हैं और हिंदू धर्म में बने रहने के बदले सवर्ण हिंदुओं से किसी मदद का दावा नहीं करते। अतः मैं प्रबुद्ध हरिजनों से उनकी अपनी खातिर यह आग्रह करूंगा कि धर्मांतरण की धमकी के नीचे वे भौतिक लाभ नहीं ढूंढें। और जबकि सुधारकों को किसी भी धमकी के आगे किसी हालत में नहीं झुकना चाहिए, उनको सवर्ण हिंदुओं के हाथों हरिजनों के लिए न्याय दिलाने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।‘‘ ख्1,

1 भारत सरकार, महात्मा गांधी की संकलित रंचनाएं, प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, नई

दिल्ली खण्ड एलएक्स 11, पृष्ठ 281 पुनमुर्दित पृष्ठ 306-308