परिशिष्ट-II समता सैनिक दल का संविधान। - Page 554

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परिशिष्ट-

समता सैनिक दल का संविधान
सैनिक की शपथ

ख्1,

मैं, अनुसूचित जाति समुदाय का एक सदस्य समता सैनिक दल में प्रवेश कर रहा हूं, और यह शपथ लेता तथा सत्यनिष्ठा से सौगंध खाता हूं कि अपने वर्ग को उत्पीड़न, शोषण और दासता से मुक्त कराने के महत् उद्देश्य में मैं एक सम्मानित साहसी, अनुशासित और योद्धा बना रहूंगा।

अपने वर्ग एवं समुदाय के न्यायोचित तथा मानव अधिकारों की रक्षा के लिए सं.सै.द. के आदेश पर आगे बढ़ने के लिए मैं सदा तैयार रहूंगा।

इस शपथ को यदि मैं अपनी कमजोरी, कायरता या बुरी नीयत से तोड़ता हूं या अपने लोगों के हितों के साथ विश्वासघात करता हूं, तो मैं दल के द्वारा पूरा दंड सहन करने को तैयार हूं। समता सैनिक दल का संविधान

नाम और संगठन

(1) संगठन का नाम ‘समता सैनिक दल’ होगा, जिसका उल्लेख उसके आगे एसएसडी के तौर पर किया जाएगा।

1 समता सैनिक दल का एक सम्मेलन 30 जनवरी, 1944 को कानपुर में आयोजित हुआ था। सम्मेलन

के अध्यक्ष श्री बी.के. गायकवाड थे, जिसमें डॉ. अम्बेडकर भी मौजूद थे और उन्होंने सम्मेलन को

संबोधित भी किया था। सम्मेलन में कुछ प्रस्ताव पारित किए गए थे। छठे प्रस्ताव के अनुसार बी.

के. उर्फ दादासाहेब गायकवाड की अध्यक्षता में सैनिक एकता दल का संविधान बनाने के लिए एक

समिति का गठन किया गया था। समिति के अन्य सदस्य श्री एम.ए. ससालेकर, एस.टी. जाधव,

आर.आर. पाटिल, के.एन. वाल्मिकी, ए.एम. कोस्तरे, पी.एल. लिलिंगकर थे। (जनता दिनांक 6 जनवरी,

1945)

तदनुसार श्री बी. के. गायकवाड़ ने 8 दिसम्बर, 1944 को संविधान का प्रारूप डॉ. बी.आर. अम्बेडकर

को भेजा (खामरमोद, खण्ड 9, पृष्ठ 405) जो डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को 13 दिसम्बर, 1944 को

मिला। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने पत्रा प्राप्ति को इन शब्दों के साथ स्वीकार किया, ‘‘मुझे आपका

पत्र और समता सैनिक दल के संविधान की प्रति भी मिल गई है।’’

(वही पृष्ठ 407)