42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
करनी है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस राजनीतिक लक्ष्य के बारे में आप सबका क्या दृष्टिकोण है ? स्वतंत्रता की इस मांग को हम, महत्व के गणित से निरस्त करते हैं। मेरे विचार में देश की वर्तमान दशा में यह विनाशकारी, दुर्भाग्यपूर्ण व असम्भव होगा। देश को स्वतंत्र होने का खतरा लोग तभी झेल सकते हैं जब वे एक देश, एक संविधान व एक प्रारब्ध की भावना से बंधे व जुड़े हों। ‘‘हम इस स्थिति से मीलों दूर हैं’’ इस सत्य को कोई नहीं नकारता। ब्रिटिश प्रभुता की सरकार वाला लक्ष्य मुझे ज्यादा अच्छा भाता है क्योंकि इसमें स्वतंत्रता तो है परन्तु पूर्ण स्वतंत्रता से जुड़े
खतरे नहीं हैं। इसलिए कांग्रेस की स्वतंत्रता की मांग को हम समर्थन न दें जैसा कि बहुत से कांग्रेसियों में भी इस बात को लेकर शंकाएं हैं।
- परन्तु डोमिनियन स्थिति के बारे में हम क्या कहेंगे क्योंकि दूसरे अर्थ में यह ‘‘स्वराज’’ ही तो है? क्या इसमें लोगों की सरकार, लोगों के लिए सरकार और लोगों द्वारा सरकार का तत्व अंतवर्लित है ? इसके बारे में निर्णय लेने से पहले हमें विचार करना है। निस्संदेह ब्रिटिश का भारत में आगमन भारत के लोगों के लिए एक वरदान रहा है। मुझे संदेह होता है कि इस दैविक सौभाग्यपूर्ण मिलन के बगैर इतनी जल्दी और इतनी अधिक बौद्धिक जागरूकता संभव नहीं थी। भारतीय समाज को कभी भी अपनी सामाजिक प्रथाओं को जिन्हें वे धर्मपरायण संहिता मान बैठ थे पर उतनी आत्मग्लानि व लज्जा अनुभव न होती अगर वे यूरोपियन सभ्यता के सम्पर्क में न आये होते, क्योंकि यूरोपियन सभ्यता के सामान्य विचारों के आधार स्वाधीनता, समानता व बन्धुत्व हैं। यह दो सभ्यताओं का जीवित सम्पर्क ही था कि निर्दयी विषमता ने भारत को आपने सामाजिक मूल्यों का पुर्नमूल्यांकन तथा बहुत सी सामाजिक प्रथाओं की सामाजिक ज्यादतियां अथवा गलतियां स्वीकारने को मजबूर कर दिया। इसने भारत को विकास पथ पर पुर्नजन्म दिया जो अन्यथा किसी भी प्रकार से सम्भव नहीं था। भारत को शानदार अवसर तथा लाभ हेतु सामान्य सरकार व्यवस्था और सामान्य कानून व्यवस्था मिले जो ब्रिटिश के भारत आगमन के बिना असम्भव था। ये दोनों साधन जो देश के हित में एक असाधारण भूमिका निभाते हैं को एक नगण्य उपलब्धि नहीं आंका जा सकता। भारत के लिए इनके महत्व का आकलन नहीं किया जा सकता। इन साधनों ने भारतीय राष्ट्रीयता की जड़ों को गहरा होने के लिए पृष्ठभूमि तैयार की और एक स्थाई सरकार की नींव डाली। ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने देश की परवाह नहीं की, क्योंकि उन्होंने आधुनिक सभ्यता लाने के लिए मुद्रा, सड़कें, नहरें, रेल तथा डाक सेवा जैसे साधन उपलब्ध कराये।