44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पाते उनमें सबसे अधिक लोग दलित वर्ग से हैं। उनकी नितांत निर्धनता के कारण अकाल पीडि़त मरने वालों की संख्या भी सर्वाधिक उन्हीं की रहती है। अगर ये आपकी प्रजा हैं और आप उनके हितैशी हैं तो उनके बारे में आप अपनी आंखें मूंद कर नहीं रह सकते और न ही उनकी इस दिल दहलाने वाली दशा की अनदेखी कर सकते हो। सज्जनो, आप लोग केवल इसलिए कि उन्हांने सड़कें सुधरवा दीं, अच्छे तकनीकी वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर नहरें बनवा दीं, रेल यातायात दिया, पत्र वाहक सेवा व तार द्वारा संदेश, मुद्रा की स्थिरता कायम, तोल और माप की नियमितता, धार्मिक विचारों में शुद्धिकरण, भूगोल, खगोल विद्या व दवाईयों तथा हमारे आपसी झगड़ों को रोक दिया हम नौकरशाही की बड़ाई में गीत तो गाते नहीं रह सकते। यह सारी प्रशंसा विधि व व्यवस्था में प्राप्त सफलता के लिए होती है। परन्तु सज्जनो हम यह न भूलें कि ऐसे लोगो जिसमें दलित वर्ग भी हैं को जीवित रहने के लिए रोटी तथा मक्खन की आवश्यकता होती है केवल विधि व व्यवस्था इसके लिए पर्याप्त नहीं हो सकते। जीवन के इस निर्दयी कटु सत्य से प्रेरित होकर दलित वर्ग को भी ऐसी सरकार की मांग उठानी आवश्यक है जिससे देश की आर्थिक समृद्धि में बढ़ोतरी आये तथा दलित वर्ग की जीवन दशा में भी सुधार हो। आप में से कुछ प्रश्न कर सकते हैं कि लोगों की कंगाली कम उत्पादन के कारण है तथा धन का असमान बंटवारा है। मैं सर्वप्रथम स्वीकारता हूँ कि बहुचर्चित ‘‘वार्षिक राजकर’’ जो इस देश के लोग इंगलैंड को देते हैं वह उस धन जो इस देश के जमींदार तथा पूंजीपति उन गरीब मजदूरों की मेहनत की गाढ़ी कमाई में (जो उनके लिए दिन रात खटते हैं) से जबरन वसूल किए धन के सामने फीका पड़ जाता है। परन्तु मैं यह समझने में असमर्थ हूँ कि आप जमीदारों तथा पूजिपतियों द्वारा गरीब मजदूरों के ऊपर लादे गये कमरतोड़ भार से छुटकारा दिलाने की ब्रिटिश सरकार से कैसे आशा की जा सकती है? प्रोफेसर डाइसी का कथन है कि सरकार चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, को दो कठिन बाधाओं से निपटना पड़ता है। पहली बाधा शासकों के चरित्र, प्रेरक शक्ति और निहित स्वार्थ से उत्पन्न होती है और यदि ब्रिटिश सरकार भारतीय समाज में जीवन्त शक्तियों से सहानुभूति नहीं रखती, शिक्षा के प्रति उदासीन है, और स्वदेशी के विरुद्ध है तो यह इस कारण नही ंकि इसकी अनुमति नहीं दे सकती बल्कि इसलिए कि यह इनके चरित्र, प्ररेणा तथा निहित स्वार्थ के प्रेरणा विरुद्ध है। दूसरी बाधा, जो सरकार की क्षमता पर हावी होती है वह बाहरी शक्तियों के विरोध का डर है। क्या भारत सरकार उन सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के महत्व