50 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
समय नागरिक अवज्ञा आंदोलन शुरू कर और गोल मेज सभा में होने वाले शांतिवार्ता को नकार कर कांग्रेस ने एक भारी भूल की है।
एक दूसरा कारण भी है जिससे मैं नागरिक अवज्ञा आन्दोलन का समर्थन नहीं कर सकता। मेरा विचार है कि आंदोलन हमारे संरक्षण व सुरक्षा हितों की रक्षा के अनुकूल नहीं है। यह आंदोलन तो जनसमूह को उद्वेलित करने की क्रिया होगी। यह एक आंदोलन है जिसका सार दबाव बनाना होगा। यह तो एक भगदड़ है और अगर इसका विस्तार कर बड़े पैमाने तक लाया जाए तो यह एक क्रान्ति में परिवर्तित हो सकता है। क्रांति, परिवर्तन लाने का एक तरीका है। एक क्रांति में विषय बहुत अनिश्चित होता है, अव्यवस्था होती है और घोर विपत्ति की स्थिति होती है, चाहे क्रांति में खून बहे या न बहे। उदाहरणतया, हम फ्रांस की क्रांति को लें, लोक दिखावे के लिए यहां गणतंत्र की स्थापना करना क्रांति का विषय था परन्तु वहां अनियंत्रित शासन की स्थापना हुई। क्रांतियां प्रायः टाली नहीं जा सकतीं अर्थात ये अवश्यंभावी होती हैं। फिर भी, हमें यह न भूलना चाहिए कि क्रांति और वास्तविक सामाजिक परिवर्तन में बहुत बड़ा अंतर है। एक क्रांति में राजनीतिक सत्ता शक्ति का परिवर्तन एक दल से दूसरे दल के पास होता है बिल्कुल वैसे ही जैसे एक जीत से सत्ता परिवर्तन एक देश या वंश से दूसरे के पास। मैं यह निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि हम केवल इस प्रकार के परिवर्तन से संतुष्ट नहीं हो सकते। हम ऐसा परिवर्तन चाहते हैं जिसमें सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ सत्ता शक्ति का वितरण भी हो जिसका परिणाम असली सामाजिक परिवर्तन हो यानि कि समाज में शक्ति का पारस्परिक परिवर्तन। यह पारस्परिक समायोजन तथा समाधान से होगा। दलित वर्ग का भविष्य पूर्णतया समायोजन को स्वीकृति और इसे कार्यान्वित करने पर निर्भर करेगा। भारत में समस्या एक सरकार बनाने की नहीं है और न ही स्वतंत्रता देने की। समस्या तो है स्वतंत्र सरकार बनाने की। दोबारा बर्क के शब्दों में ‘‘सरकार बनाने के लिए कोई बहुत दूरदर्शिता की आवश्यकता नहीं होती। सदस्य चुनने के अधिकार की शक्ति को निर्धारित करो, आज्ञाकारी होने की शिक्षा दो और कार्य हो गया। स्वतंत्रता देना तो और भी आसान है। इसमें मार्ग -दर्शन की कोई आवश्यकता नहीं है केवल लगाम थमा दो। किन्तु स्वतंत्र सरकार बनाने के लिए स्वतंत्रता और नियंत्रण के दो परस्पर विरोधी तत्वों का समरूप मिश्रण बनाना अनिवार्य है और इसके लिए गहरी सोच व चिंतन की आवश्यकता है।
सज्जनो, ये वे कारण हैं जिसके लिए मैं यह सोचता हूं कि दलित वर्ग को नागरिक अवज्ञा आन्दोलन का समर्थन नहीं करना चाहिए। यह उनके हित