52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उपवास रखा। क्या महात्मा गांधी ने कभी छूतों व अछूतों के बीच सद्भावना या उदारता भावना के लिए एक दिन का भी व्रत रखा? यदि कुछ ऐसे प्रयोग किए होते तो कोई भी कांग्रेस मंच को स्वीकृति देता। परन्तु छुआछूत के दाग को हटाने के ऐसे किसी भी असली प्रयास का कोई साक्ष्य या प्रमाण उपलब्ध नहीं है। परन्तु हमें मालूम है कि कैसे स्वामी श्रद्धानन्द को जब यह लगा कि कांग्रेस छुआछूत हटाने का दिखावा करने के अतिरिक्त इस विषय पर कुछ भी करना नहीं चाहती तो उन्हें निराश होकर कांग्रेस छोड़नी पड़ी। अगर कांग्रेस के द्वारा पारित प्रस्तावों के आधार पर निर्णय लेना हो तो कोई भी आसानी से यह स्वीकार नहीं करेगा कि कांग्रेस एक विशाल जन समूह का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी है। इसके आर्थिक प्रस्तावों के अवलोकन से पता चलता है कि इसका ध्यान उच्च वर्ग एवं मध्यम वर्ग के विषयों पर केन्द्रित हैं। इस पार्टी के व्यापार सम्बन्धी प्रस्ताव व्यापारिक तथा निर्माताओं से सम्बन्धित हैं और कामगार, मज़दूर को बड़ी कठोरता से भुला दिया गया है। एक संस्था जो एक पाउंड की तुलना में रुपये के 16 पैसे विनिमय मूल्य का समर्थन करती है उसे जनसमूह की प्रतिनिधि कहलाने का अधिकार तो
खोना ही होगा। नमक कर का विषय नागरिक अवज्ञा आन्दोलन से जोड़कर कांग्रेस को नया मुखौटा नहीं मिल सकता। नमक कर का विरोध विस्फोटक है तथा राजनीतिक आन्दोलन के लिए एक स्वागत योग्य पहलू है। परन्तु जैसे खीर का मानदण्ड उसके स्वाद में है वैसे ही नमक कर का असली मानदण्ड इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी तत्परता से इसके बदले में बोझा कहीं और डालने के लिए समारोपण कर पाएंगे जो पूंजीपति को तो काटे परन्तु निर्धनों को अपने प्रभाव से मुक्त कर सके। समय ही अकेले इसके साथ जुड़ी वास्तविकता का बयान कर सकता है। मुझे इस बात में कोई शक नहीं कि जब परीक्षण का समय आएगा तो बहुत से कांग्रेसी तुरन्त अमीरों के साथ में हांगे न कि जनसमूह के साथ। कांग्रेस गरीबों तथा जनसमूह की समस्याओं के प्रति उदासीन और निरूत्साहित रहेगी, यह एक अवश्यंभावी सत्य है। क्योंकि कांग्रेस एक राष्ट्रीय आन्दोलन का प्रतिनिधित्व कर रही है और वह एक राजनीतिक पार्टी नहीं है। इसलिए इसके कार्यक्रम और योजना सब गोलमाल हैं। यह सबको अवश्य विदित हो गया होगा कि एक संस्था अगर सबका हित सोचने को बाधित है तो संस्था केवल कुछ लोगों के हित की निगरानी का नाटक मात्र कर सकती है और सबसे कमज़ोर को उसके भाग्य पर छोड़ देगी। मैं यह समझने में असमर्थ हूँ कि हम कांग्रेस से समर्थन की आशा कैसे कर सकते हैं जब उसके ऐसा करने से हमारे विरोधी कांग्रेस के विरुद्ध हो जाएंगे और कांग्रेस उनके समर्थन के बल पर ही जीवित है।