7. 27.9.1930 वर्तमान से अधिक संगठित और ज्यादा आंदोलित बने। - Page 78

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दलितों की एक आध्यात्मिक संस्था ‘‘संत समाज संघ’’ का 36वां वार्षिक सम्मेलन 27 सितम्बर, 1930 बृहस्पतिवार को पूना में आयोजित किया गया। इसमें डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की पूर्व निर्धारित व्यस्तता के कारण अनुपस्थिति में श्री बी. जी. जगताप, प्राचार्य शिवाजी मराठा उच्च विद्यालय ने अध्यक्षता की।

श्री के.जी. पातड़े, सचिव, दलित वर्ग शिष्ट मण्डल समिति, पूना ने सभासदों को संबांधित कर संघ व इसके कार्य के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि संघ का संदेश दलित वर्ग को सामाजिक समता दिलाना है। समाज के लोगों तथा दलितों में एकता लाना ‘‘संत समाज संघ’’ संस्था का नैतिक दायित्व है। उन्होंने डॉ. अम्बेडकर और सूबेदार घाटगे की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि उनके विचार से दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए सूबेदार घाटगे को बम्बई विधान परिषद में भेजना उनके हित में होगा।

इस समय तक डॉ. अम्बेडकर भी पंहुच गये थे तथा उन्होंने अपना स्थान ग्रहण कर लिया था। अतः जब वे सभा को संबोधित करने के लिए उठे, तो वातावरण उनके जय-जयकार से गूंज उठा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जितना कुछ वे अपने निजी प्रयास से कर पा रहे थे दलितों की शिकायतों को दूर करने के लिये अपर्याप्त है। इसलिए ‘‘और अधिक संगठित होकर और ज्यादा उत्तजित होकर आन्दोलन करो’’ का संदेश दिया। डॉ. अम्बेडकर ने जोर देकर कहा कि गोलमेज अधिवेशन में वे ब्रिटिशों को दलितों की समस्याओं से अपने सामर्थ्य के अनुरूप पूर्णतया अवगत कराकर उनके लिए अधिकतम अधिकार सुनिश्चित करेंगे। ख्1,

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1 टाइम्स ऑफ इडिया, दिनांक 29 सितम्बर, 1930