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वे अल्पसंख्यकों पर प्रभुता बनाये रखेंगे। दलित वर्ग इसी बात का विरोध करते हैं। उन्हांने घोषणा की कि अगर सवर्ण उन्नत समाज के इस दृष्टिकोण से गोलमेज अधिवेशन वार्ता असफल होती है तो इसके लिए कांग्रेस तथा सवर्ण उन्नत हिन्दू ही दोषी होंगे। उन्होंने आश्वासन जताया कि गोलमेज अधिवेशन वार्ता के हिन्दू विशिष्ट प्रतिनिधि अगर वार्ता की सफलता चाहते हैं तो वे अल्संख्यकों द्वारा उठाई मांगों को स्मरण रखेंगे। आगे डॉ. अम्बेडकर ने बताया कि उनकी इंगलैंड में कुछ ज्यादा दिन रुककर आवश्यक कामों को निपटाने की मंशा थी। दलित वर्ग की दो बड़ी शिकायतें थीं कि दलितों की पुलिस तथा फ़ौज में भर्ती पर रोक थी और वे यह शिकायत युद्ध कार्यालय तथा ब्रिटिश मंत्रालय के सामने रखना चाहते थे ताकि यह रोक हट सके। वे दलितों के हित में प्रचार करने रूस, जर्मनी, अमेरिका व जापान भी जाना चाहते थे। कांग्रेस इन देशों में इंगलैंड के विरुद्ध प्रचार कर रही थी। इसलिए, बाबा साहेब भारत में दलितों की वस्तुस्थिति से इन देशों के लोगों को परिचित कराने के पक्षपर थे और उनकी दलितों के प्रति सहानुभूति प्राप्त करने को उचित मानते थे।
तत्पश्चात श्री केलुसकर और श्री नायक ने सभा को संबोधित किया ख्1, । यद्यपि डॉ. अम्बेडकर ने कई और विषयों पर चर्चा की थी जिसका कीर के अनुसार प्रलेखन किया जो नीचे वर्णित हैं।
-संपादकः
इस सम्बोधन के उत्तर में डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि उनकी थोड़ी बहुत सफलता का श्रेय असंख्य लोगों तथा सहकर्मियों के सहयोग को जाता है। उन्होंने डॉ. सोलंकी द्वारा विधान परिषद में उनकी सहायता और उनके अच्छे कार्य की प्रशंसा की तथा देवराव नायक को अपना दाहिना हाथ कहा और यह विश्वास जताया कि उनकी अनुपस्थिति में देवराव नायक उनके द्वारा चलाये गए आन्दोलन को सही दिशा प्रदान करेंगे। उन्होंने श्री शंकर राव एस. पार्शा का विशेष रूप से आन्दोलन पर भारी धन राशि खर्च करने के बारे धन्यवाद ज्ञापन किया।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि गोलमेज अधिवेशन निश्चय ही दलितों के हित में है। उन्होंने आगे कहा कि जहां तक मेरा प्रश्न है मैं अपने लोगों के लिए न्यायोचित मांग करूंगा और स्वराज की मांग का समर्थन करूंगा। अंत में उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर संभव हुआ तो दलितों की समस्या राष्ट्रों की महापंचायत के समक्ष रखेंगे। उन्होंने अपने सहयोगियों तथा लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि आपसी झगड़ों से बचें अन्यथा नेतागीरी का लालच उनकी शक्ति को कम कर उनकी स्थिति और
खराब कर उनके ध्येय का अहित करेगा।’’ ख्2,
12 टाइम्स ऑफ इडिया, 3 अक्तूबर, 1930 कीर, पृष्ठ 145