60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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गोलमेज अधिवेशन के दूसरे सत्र की सभा में अछूतों के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को सम्मलित होना था। उनको भारत से लन्दन के लिए 15 अगस्त 1931 को प्रस्थान करना था। इसके उपलक्ष में 14 अगस्त 1931 को सर कावसजी जहांगीर हाल में एक विदाई समारोह का आयोजन किया गया था। इस सभा की अध्यक्षता डॉ. पी.जी. सोलंकी ने की। डॉ. अम्बेडकर ने दो अलग अलग सभाओं, एक महिलाओं के लिए शाम 8 बजे तथा दूसरी पुरुषों के लिए रात्रि 10 बजे, को संबोधित किया। ख्1,
डॉ. अम्बेडकर ने एक उत्तेजक भाषण से दलित वर्ग की महिलाओं का संबोधन किया। उन्होंने आवाहन करते हुए कहा ‘‘अगर आप अपनी दासता को जड़ से समाप्त करने के लिए परेशानियां तथा कठिनाइयों को झेलने के लिये तत्पर हैं और अगर यह कठिन कार्य करने में मैं सफल हो जांऊ तो इसका श्रेय आप लोगों को होगा।’’
इसके तुरन्त बाद इसी स्थल पर उन्होंने दलित वर्ग के पुरुषों को संबोधित किया। बड़े भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि उन लोगों के असीम प्यार से वे बहुत प्रोत्साहित हुए हैं। जहाँ तक गोलमेज अधिवेशन का प्रश्न है उन्होंने कहा, ‘‘125 सदस्यों की सभा में हम केवल दो लोग आपके प्रतिनिधि होंगे परन्तु आप निश्चित रहें कि हम तुम्हारे जन कल्याण के लिए जमीन आसमान एक कर देंगे। आज अपराह्न में मेरी गांधी से बातचीत हुई थी। अभी तुम्हारे हित में वो कुछ भी नहीं कर सकते। हमें स्वावलंबी बनना होगा और अपने अधिकारों की लड़ाई स्वयं अपनी क्षमता से लड़नी होगी। अतः अपना आन्दोलन जारी रखो तथा अपनी शक्तियों को सुव्यवस्थित करो। शक्ति और सम्मान तुम्हें संघर्ष से मिलेगा।’’ ख्2,
1 जनता, 17 अगस्त, 1931
2 कीर, पृष्ठ 168