72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
11
रखें
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने विशेषाधिकार समिति के सदस्य के नाते 1932 में
मद्रास की यात्रा की। ‘‘28 फरवरी को मद्रास में डॉ. अम्बेडकर का भव्य स्वागत हुआ,
जिसमें दलित वर्ग के 10,000 लोगों ने भाग लिया। स्वागत समारोह में मुसलमानों,
ईसाइयों व गैर ब्राहमणों ने भी भागीदारी की। दलित वर्ग सेना सेवा के अध्यक्ष ने
अध्यक्षता की। लगभग सभी दक्षिण भारत के दलित वर्ग संगठनों, जैसे दलित वर्ग
सैनिक सेवा संस्थान, मद्रास प्रादेशिक दलित वर्ग फ़ैडरेशन, आदि द्राविड़ मलयालम
सभा, आदि आन्ध्र महासभा, अरुनधात्ये महासभा, केरल दलित वर्ग संघ और मजदूर
यूनियन के अध्यक्षों ने सर्वसम्मति से डॉ. अम्बेडकर को सम्मान पत्र भेंट किया।
सभा में डॉ. अम्बेडकर ने पृथक चुनाव नामावली से बदलकर संयुक्त चुनाव
नामावली में आरक्षित स्थान को राजा की कलाबाजियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा
कि राजा को अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ की काम्पटी सत्र में होने वाली सभा
से पहले वचनबद्धता नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने इसलिए अछूतों को राजनीतिक
शक्ति पर कब्जा करने को प्रोत्साहित किया तथा अलिखित झूठे वादों से बचने की
नसीहत दी और कहा कि केवल उन नेताओं का विश्वास करें जिन्होंने स्वयं व्यथाए
झेली हैं। अन्त में, उन्हांने श्रोताओं को स्मरण कराया कि गौतम बुद्ध तथा रामानुज
जैसे उच्च जातीय स्पृश्य नेताओं ने उनकी स्थिति सुधारने तथा अस्पृश्यता के धब्बे
को हटाने के संघर्ष को सदैव अपनी दृष्टि में रखें।’’ ख्1,
1 कीर, पृष्ठ संख्या 196