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अछूतों को राजनीतिक शक्ति मिलनी चाहिए
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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ के दूसरे सत्र की सभा काम्पटी में रखने का निर्णय लिया। स्वागत समिति के प्रधान एल.एन. हरदास ने सभा का महत्व बताने को निम्न परिपत्र जारी किया- सम्पादक
‘‘जैसा आपको विदित है सभा का दूसरा सत्र अग्रिम अप्रैल की 24 व 25 तारीखों को काम्पटी में होगा।
इस सभा का बड़ा भारी महत्व है। इस सत्र में निम्नलिखत विषयों पर चर्चा की जायेगी।
- गोलमेज़ अधिवेशन में प्रस्तुत अल्पसंख्यक समझौता जिसमें दलित वर्ग के
प्रतिनिधि सहभागी हैं।
- एक केन्द्रीय संगठन की स्थापना जो भारत के दलितों के हित के लिए
कार्य करेगा तथा बात करेगा।
अल्पसंख्यक समझौता नये संविधान के अंर्तगत दलित वर्ग के राजनीतिक अधिकारों का मूर्तिरूप है। बहुसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों ने इसे गोलमेज़ अधिवेशन में स्वीकृति नहीं दी। यद्यपि दलित वर्ग ने इस अल्पसंख्यक समझौते को पूरा समर्थन दिया था। हाल ही में कुछ दलित संगठन जो अपने आपको दलितों के मसीहा कहते हैं और दलितों की बात करते हैं को हिन्दू महासभा ने किन्हीं तर्कों से कायल कर लिया है, इसलिए यह संगठन अल्पसंख्यक समझौते को नकारने लगे हैं। इसलिए, यह अति आवश्यक है कि दलित वर्ग के प्रतिनिधि मिलें तथा बुद्धि जीवी लोग इस अल्पसंख्यक समझौते के प्रावधानों को गहन विचार से पढ़ें, समझें व चर्चा कर अपने निर्णय से अवगत करायें। इस सम्बन्ध में गोलमेज़ अधिवेशन में दलितों के प्रतिनिधि डॉ. बी.आर. अम्बेडकर तथा राव बहादुर आर. श्रीनिवासन भी इस सभा में उपस्थित रहकर अल्पसंख्यक समझौते की परिस्थितियों तथा प्रावधानों की व्याख्या करेंगे।
राव बहादुर एम.सी. राजा तथा श्री जी. ए. गवई को आमंत्रित करने का भी प्रस्ताव है ताकि अल्पसंख्यक समझौते को पारित करने से पहले उनके विचार जानने का लाभ हमें मिल सके।