74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस सभा को बुलाने का दूसरा प्रयोजन उतना ही महत्वपूर्ण भी है। इसकी विस्तार से चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आप जानते हैं कि कैसे राजनीतिक विषयों पर दलितों की राय का गलत प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है। इन षड़यन्त्रों को समाप्त करने के लिए एक केन्दी्रय संगठन को तुरंत गठित करने की आवश्यकता है और दलित वर्ग से संबंधित विषयों पर टीका टिप्पणी के लिए, केवल इस संगठन का प्रवक्ता ही अधिकृत हो।
अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ नाम की संस्था द्वारा अपनाई जाने वाली चालों को रोकने के उद्देश्य से इस सभा को बुलाना आवश्यक है। समाचार पत्रों में छपा था कि इस संघ की कार्यकारिणी समिति को सभा गत 21 व 22 फरवरी को दिल्ली में हुई थी। इस सभा में संयुक्त या पृथक निर्वाचक मंडल तथा नये संविधान में दलितवर्ग को कितने आरक्षित स्थानों का प्रस्ताव किया जाए। किन्तु इन विषयों पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। इसलिए, इस संघ की कार्यकारिणी ने निर्णय लिया कि दलित वर्ग के मुख्य नेताओं का अधिवेशन इन विषयों पर चर्चा के लिए नागपुर बुलाया जाये। ऐसी आशा थी कि अधिवेशन रखा जाएगा परन्तु अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ ने अघोषित बताये कारणों से यह अधिवेशन नहीं बुलाया। इन परिस्थितियों में दलित वर्ग की जनता की लामबंदी तथा एक निश्चित राय बनाने के लिए यह सभा बुलाना अति आवश्यक हो गया है, जिससे न ही कोई शरारत हो सके और न ही किसी चाल से कोई नुकसान हो और इन बड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जनता की राय कायम करने का अवसर मिल सके।
इसलिए मैं आशान्वित हूं कि इस सत्र के महत्व को ध्यान में रखते हुए आप इस सभा के लिए अवश्य समय निकालेंगे तथा उपस्थित रहेंगे।
आपका विश्वसनीय,
एल. एन. हरदास
अध्यक्ष, स्वागत समिति ख्1,
‘‘डॉ. बी. आर. अम्बेडकर शिमला से बम्बई 4 मई, 1932 को वापस पहुंचे। तुरंत 6 मई 1932 को वे कलकत्ता मेल में बैठकर अखिल भारतीय दलित वर्ग कांग्रेस संघ की नागपुर के समीप काम्पटी की सभा के लिए प्रस्थान कर गए। डॉ. अम्बेडकर की सुविधा के लिए पहली सभा को स्थगित किया गया था। यात्रा
1 जनता : अप्रैल 9, 1932