90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बारे में सोचना पडे़गा।
(2) इस परिषद की राय में श्रीक्षेत्र पंढरपुर के विठोबा मंदिर में प्रवेश हो सके ऐसी व्यवस्था अस्पृश्य वर्ग करे और जरूरत पड़ने पर वहां सत्याग्रह भी किया जाए।
(3) यह परिषद तय करती है कि हर जिले में वतनदार महारों की शिकायतें दूर करने के लिए प्रयासरत एक महार वतनदार संघ की स्थापना हो। इसके अनुसार यह परिषद सोलापुर जिले में एक संघ की स्थापना करने की तथा हर सदस्य गांव से सालाना 5 रुपयों का चंदा लेने की मंजूरी देती है। इस संघ को आगे बताए गए लोग चलाएंगे -
सोलापुर तहसील - विश्वनाथ मेघाजी बंदसोडे
पंढरपुर तहसील - बापू ऐलूनी सर्वगोड
करमाले तहसील - गोविंद गोपाल कांबले
मालशिरस तहसील - तात्याबा पांडुरंग सावंत
सांगोले तहसील - चोखा शिंदू काटे
मांढे तहसील -पिराजी मरीबा सरवदे
बार्शी तहसील - सखाराम महादू बोकेफोडे
सोलापुर शहर - जिवाप्पा सुभानराव ऐदाले
सचिव - हरिभाऊ तोरणे
उपरोक्त चुने गए सदस्यों को यह सभा संघ के नियम तैयार करने के अधिकार दे रही है। और उनके बनाए नियम आगे दिए जा रहे। वतनदार जिला सभा में उसे मंजूर किए जाएं और यह सभा कम से कम दो सालों के अंदर-अंदर ली जाए।
(4) सोलापुर, पंढरपुर आदि म्युनिसिपालिटी के गांवों में और जिलों में रातंजन, कारी, देगाव आदि गांवों में महारों के मालिकियत की जमीनें गांव की जमीनों में शामिल की गई हैं, इससे महारों का बहुत नुकसान हुआ है। सो, जिले के कलक्टर से इस बारे में फिर से पूछताछ पुनरसमीक्षा करने की विनती यह सभा करती है।
(5) इस जिले में जिन गांवों में वतनी इनाम जमीनें नहीं हैं ऐसे गांवों के महार लोगों को उन्हीं के गांवों की परती अगर फॉरेस्ट की जमीन हो तो वतन के रूप में ईनाम के तौर पर दी जाएं।
(6) बेलापूर, मासणूर, रालेरास, पानगाव, चिखरडे, कोसगाव, चाकुरे, शिखावी, मेडद, दहिगाव, भांबुर्डी, रातंजन, सुरडी, गुरसाले, तहसील मालशिरस, लोणंद गांव