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में पाटील-कुलकर्णी के उकसाने/भड़काने पर लोगों ने षड्यंत्र कर महारों को गांव से भगा देने की योजना बनाई है। इसलिए, इस गांव में हो रहे जुलूम के बारे में पूछताछ कर सरकार महारों की सुरक्षा का इंतजाम करे।
(7) सोलापुर जिले के वतनदार महार परिषद की राय में हर जिले के महार लोगों की आर्थिक गुलामी नष्ट करने के लिए तथा उनका पारिवारिक जीवन अधिक सुखमय हो इसके लिए हर जिले में वतनदार महार संघ सहकारी मंडल की स्थापना की जाए। सूत बनाना, कपड़ा बुनना इन कामों का प्रसार करने की तथा सहकारिता किसानवर्ग विस्थापन कालोनी स्थापन करने की जितनी जल्दी संभव हो व्यवस्था की जाए।
(8) इस सभा का सरकार से यह अनुरोध है कि, जंगल की जमीनें अन्य वर्ग के लोगों को देने से पहले अस्पृश्यों की अर्जियों पर विचार किया जाए। जिन शर्तों पर जंगल की जमीनें देना तया हुआ हो, वे शर्तें अस्पृश्य वर्ग के इंसान को अगर मंजूर हों तो खेती योग्य भूमि अन्य जातियों के अर्जदारों को बिना दिए अस्पृश्य वर्ग के अर्जदार को ही दी जाएं।
उपरोक्त प्रस्तावों पर मेसर्स सीताराम नामदेव शिवतरकर, धोंडीराम गायकवाड़, बोरकर, माने, कांबले, बंदसोडे, गोविंद कांबले, वेसकर, शिवणकर, बोकेफोडे, साबले, तोरणे आदि वक्ताओं के समयानुरूप भाषण हुए।
इस प्रकार आम सहमति से प्रस्ताव पारित होने के बाद अध्यक्ष तथा उपस्थितों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया गया। फूलमालाएं और गुलदस्ते देने के बाद डॉ. अम्बेडकर के जयकार की घोषणाओं के साथ समापन कर परिषद का काम पूरा हुआ।