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हालत बिगड़ने लगी। आज हमारे लोगों को पुलिस में भर्ती नहीं किया जाता और जगहों पर भी नौकरियों के लाले पडे़ हैं। पुणे में हमारे वर्ग का एक ग्रेजुएट लड़का है, मगर उसे नौकरी दिलाने के लिए दो साल से सरकार के साथ संघर्ष कर रहा हूं। मैं जानता हूं कि इस सरकार के ही कुछ अफसर इस काम में बाधक बन रहे हैं। महाड़ में हम जो सत्याग्रह करने वाले हैं और उस कार्य के लिए आप लोगों ने हमें जो आर्थिक सहायता की है, उसके बारे में यह मत समझना कि हम आपकी गाड़ी के घोड़े हैं और उसके लिए आपने हमें यह चने (छोले) दिए। यह सबका काम है। महाड़ में चवदार तालाब पर जो सत्याग्रह हम करने जा रहे हैं वह इसलिए हो रहा है, क्योंकि स्पृश्य हिन्दू हमें अपवित्र मानते हैं। ऐसा नहीं है महाड़ में अस्पृश्यों के लिए पानी का अकाल पड़ गया है, बल्कि इसलिए कि स्पृश्य हिन्दू और हम समान हैं। यह हमारा अधिकार है और इस अधिकार के प्रतिपादन के लिए सभी को तैयार हो जाना चाहिए, दृढ़ संकल्प करना चाहिए। मेरा विश्वास है कि वहां कोई भी अप्रिय घटना नहीं होगी। इसलिए मेरा अनुरोध है कि आप निशंक होकर सत्याग्रह में भाग लें।