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इस सभा में उपस्थित रहने से किसी को डरना नहीं चाहिए। साथ ही किसी भी सनातनधर्मी आदमी का स्वार्थ से उपजा उपदेश सुनने की भी जरूरत नहीं। यह मसला इंसानियत का है। स्पृश्य लोगों द्वारा हम पर जो पैदाइशी अपवित्र होने का आरोप लगाया गया है, उसे हमें धो डालना है।
ऐसा नहीं कि यह कलंक केवल हम पर ही है। जिन सुशील माता-पिता के घर हम पैदा हुए हैं, उन पर भी यह कलंक लगाया गया है। उसे हटाना, दूर करना हर सुपुत्र का कर्त्तव्य है। इसी कर्त्तव्य को निभाने के लिए मेरी विनती है कि आप सब लोग इस परिषद में उपस्थित रहें।
इस काम के लिए धन की जरूरत है। जो लोग धन या अनाज देकर सहायता कर सकते हैं वे अवश्य ही सहायता करें। जिस काम के लिए हमारे हस्ताक्षर वाले
खत और रसीदें लेकर स्वयंसेवक घूम रहे हैं। जो मदद देनी हो उन्हें दें, वे उसे हम तक पहुंचाएंगे। मदद के तौर पर आप जो भी देना चाहें वह उन्हें दें और रसीद लें। या आप अपनी मदद, सचिव, बहिष्कृत हितकारिणी सभा, दामोदर हाल, परेल, मुंबई, इस पते पर भेज दें, ऐसी नम्र विनती है।
आपका विनम्र,
डॉ. भीमराव अम्बेडकर
एम.ए. पी.एच.डी., बार एट लॉ, एम.एस.सी. अध्यक्ष
सदस्य-
राजमान्य राजेश्री, शिवराम गोपाल जाधव
रा. रा. संभाजी तुकाराम पौंडकर
रा. रा. बालाराम रामजी अम्बेडकर *
रा. रा. निर्मल लिंबाजी गंगावणे
रा. रा. राघो नारायण वनमाली
रा. रा. गणपत महादेव जाधव
रा. रा. गोविंद रामजी आडरेकर
रा. रा. पांडुरंग महादेव ववूरकर
रा. रा. लक्ष्मण गप्पू पुसईनकर
रा. रा. सखाराम रत्नाजी नागावकर
* इनकी मृत्यु 12 नवंबर, 1927 को हुई। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने प्रस्तुत पत्रक इस घटना से पहले छपवाया होगा। -संपादक)