17. महाड सत्याग्रह परिषद - दिसंबर 1927 महाड - Page 113

96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रा. रा. अर्जुन रामजी नागावकर

रा. रा. चांगदेव रामायण मोहिते

रा. रा. पांडुरंग बाबाजी मांडलेकर

रा. रा. भागुराम रामजी शिरगावकर

रा. रा. सोनू सजन संदीरकर

रा. रा. विठ्ठल लक्ष्मण तिडकर

रा. रा. भाऊ बालू जाधव

रा. रा. भाविकनाथ रत्नू सालवे

रा. रा. पंढरीनाथ रामचंद्र आसुडकर

रा. रा. सीताराम नामदेव शिवतरकर

सचिव, सत्याग्रह कमेटी *

यह तीन दिनों तक चलने वाली महाड़ परिषद 25, 26 और 27 दिसंबर, 1927 को हुई थी। सभा की तैयारी का जिम्मा रा. अनंत विनायक चित्रे को सौंपा गया था। महाड़ सत्याग्रह में चित्रे जी ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी सेहत को देखते हुए किसी के भी मन में यह आशंका उठ सकती थी कि क्या वे इतनी बडी जिम्मेदारी को निभा पाएंगे? लेकिन जिस सत्याग्रह कमेटी ने रा. चित्रे को यह जिम्मा सौंपा वे जानते थे कि उनमें कितनी चेतना भरी हुई है। परिषद के लिए रा. चित्रे ने जो काम किया, उसे देखने वालों को भी उनकी काबिलियत पर भरोसा हुआ। परिषद की सफलता का सारा श्रेय रा. चित्रे को ही जाता है। रा. चित्रे पंद्रह दिन पहले ही महाड पहुंचे। कुछ युवा लोगों के अलावा उन्होंने महाड़ के सभी स्पृश्य लोगों को सत्याग्रह के खिलाफ पाया। परिषद के कार्य में बाधा खड़ी करना और गांव में परिषद को किसी तरह का कोई सामान न मिले, इस बारे में गांव वालों के षड्यंत्र का उन्हें पता चला। तब उन्होंने अपने कायस्थ जाति के युवाओं को साथ लेकर अपना काम पूरा करने की ठानी। शांताराम पोतनीस, केशवराव देशपांडे, रा. वामनराव पत्की, कमलाकर टिपणीस आदि लोगों ने उनकी खूब सहायता की। इनमें विशेष रूप से रा. पत्की ने बहुत मदद की। उनकी मदद के बगैर परिषद के लिए जरूरी सामग्री मिल ही नहीं पाती। कई चीजें परिषद उधार भी ले सकती थी, लेकिन गांव के लोगों का विरोध होने के कारण हर चीज खरीद कर लानी पड़ी। इस कारण परिषद का खर्चा बढ़ा। हालांकि सोना देकर भी जहां चीजें खरीदी नहीं जा सकती

* डॉ. भी. रा. अम्बेडकर चरित्र : चां. भ. खैरमोड़े, खंड 3, पृष्ठ 141-142