17. महाड सत्याग्रह परिषद - दिसंबर 1927 महाड - Page 114

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थीं, वहां इतना बढि़या इंतजाम कैसे किया गया यही बड़े आश्चर्य की बात है। इतने बढि़या इंतजाम के लिए रा. पत्की को जितना भी धन्यवाद दें, कम है। उनका साथ देने के लिए पुणे से श्री घाडगे, रा. थोरात और भानगर से रा. भानगरकर जमेदार दिनांक 24 को महाड़ आए थे। वहां इकट्ठा हुए प्रतिनिधियों को अनुशासन सिखाना, सबके खाने का इंतजाम करना आदि कठिन काम उनके जिम्मे सौंपे गए थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी इतने बढि़या ढंग से निभाई कि सब लोग देखते रह गए। इस सभा का महत्व भांप कर 19 तारीख से ही कलक्टर, जिला पुलिस सुपरिंटेंडेंट आदि अधिकारी लोग महाड आकर रुके थे। 23 तारीख से प्रतिनिधियों का आना शुरू हुआ और 25 तारीख को इस समुदाय में लोगों की संख्या 10,000 से अधिक हो गई थी। इस दौरान 25 तारीख को अस्पृश्यों को तालाब पर जाने से मना करने वाला आदेश कलक्टर से नहीं मिलने वाला है, यह जानने के बाद स्पृश्य लोगों ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और अन्य चार अस्पृश्यों पर महाड के दीवानी न्यायालय में फरियाद दाखिल की थी और न्ययालय में अर्जी दाखिल कर 25 तारीख को अस्पृष्य लोग चवदार तालाब पर इकट्ठा न हों इस आशय का मनाही आदेश न्यायालय से प्राप्त कर लिया था। इस कार्रवाई के कारण कलक्टर नाराज हो गया था लेकिन दीवानी अदालत की अवमानना न हो, इसलिए उन्हें अपनी पुरानी नीति में कुछ बदलाव करना पड़ा। हालांकि, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 144 के तहत वे अपने अधिकार के तहत मनाही का आदेश निकाल सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। आखिर तक साम, दाम मार्गों का अवलंब किया गया। यह विशेष रूप से ध्यान में रखने की बात है। हालांकि 23 तारीख से परिषद के कैंप में सुबह शाम उपस्थित रहकर कलक्टर ने लोगों को उपदेश देकर सत्याग्रह से पीछे हटाने की कोशिश की। लेकिन उपदेश करने के बाद जब-जब वे पूछते कि आप जिले के कलक्टर की बात मानेंगे या डॉ. अम्बेडकर की तो हर बार उन्हें यही जवाब मिलता कि हम डॉ. अम्बेडकर की बात मानेंगे।

डॉ. अम्बेडकर का महाड़ में आगमन

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डॉ. अम्बेडकर और अन्य दो-ढाई सौ लोग मुम्बई से 24 दिसम्बर, 1927 की सुबह ‘पùावती’ नाव में सवार होकर निकले। मुंबई के रा. शिवतरकर, धोंडी नारायण गायकवाड़, कांबले, गंगावणे, वनमाली, पुणे के राजभोज, नासिक के भाऊराव गायकवाड़ आदि अस्पृश्य नेता उपस्थित थे। उनके साथ स्पृश्य लोगों में से सोशल सर्विस लीग के कार्यकर्ता सहस्त्रबुद्धे और समता संघ के प्रधान बंधु भी शामिल हुए। ”ब्राह्मण ब्राह्मणेतर“ के संपादक, रा. देवराव नाइक बीमारी के कारण उपस्थित नहीं हो पाए। सत्याग्रही लोग बंदरगाह पहुंचने के पूर्व ही बंदरगाह पर उनके स्वागत और अभिनंदन के लिए वहां कई लोग इकट्ठा हुए थे। उन्होंने नेताओं का स्वागत