98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
फूलों के हार पहना कर और गुलदस्ते देकर किया। महाड़ सत्याग्रह के जयघोष से किनारा गूंज उठा। 9 बजे पùावती नाव मुंबई से निकली थी जो शाम साढ़े पांच बजे हरेश्वर बंदरगाह में पहुंची। रात में जितने भी बंदरगाह मिले हर जगह सत्याग्रह की जय के नारे लगते रहे। कोल मांडला में स्वागत
धरमतर से महाड जाना बहुत आसान था। लेकिन मोटर वाले लोगों ने अगर हड़ताल की तो मुंबई के लोगों के लिए 50-55 मील तक चल कर महाड पहुंचना असंभव होगा। इसलिए धरमतर के रास्ते से न जाते हुए दासगाव की राह से जाना मुम्बई के सत्याग्रहियों द्वारा तय हुआ। कोल मांडला के लोग यह बात जानते थे। उन्होंने एक स्वागत कमेटी बनाई। और मुंबई से आने वाले सत्याग्रहियों का स्वागत करने की सारी तैयारी कर ली। इस स्वागत कमेटी के अध्यक्ष श्री पांडुरंग बाबाजी मांडलेकर थे। कोल मांडला जैसे गांव में उन्होंने जैसा इंतजाम किया था, वह इतना बढि़या था कि वैसा इंतजाम मुंबई जैसे शहर में भी शायद नहीं होता। यहां लोगों ने सुखपूर्वक रात बिताई। सुबह नाश्ता करने के बाद आठ बजे लोग दासगाव जाने के लिए अंबा नामक जहाज में चढ़े और निकले। दोनों तरफ बडे़-बड़े पहाड़ और बीच में से खाड़ी और आस-पास हरे-भरे पेड़ इस तरह का बेहद सुंदर नजारा सूरज की रोशनी में मन को मोह रहा था। साढ़े बारह बजे अंबा दासगाव पहुंची। वहां करीब तीन हजार लोग महाड़ जाने के लिए बाबासाहेब तथा अन्य मुम्बई के सत्याग्रहियों का इंतजार कर रहे थे। साथ ही कुलाबा जिले के पुलिस सुपरिंटेंडेंट मि. फेरेंट, पुलिस इंस्पेक्टर, फौजदार आदि पुलिस अधिकारी वहां उपस्थित थे। पुलिस सुपरिंटेंडेंट साहब और डॉ. अम्बेडकर ने एक दूसरे से कुशल-मंगल पूछा। फिर डॉ. अम्बेडकर को उन्होंने पत्र सौंपा जिसमें लिखा था कि कलक्टर साहब मिस्टर हूड आपसे मिलना चाहते हैं। इसलिए डॉ. अम्बेडकर और श्री सहस्त्रबुद्धे फेरेंट साहब की मोटर में बैठ कर महाड़ गए। जाने से पहले दासगाव में उपस्थित हुए लोगों को इकट्ठा कर बताया कि अनुशासनबद्ध तरीके से, शांतिपूर्वक ढंग से महाड़ आएं।
दासगाव से महाड़ तक
दासगाव बंदरगाह से महाड़ करीब पांच मील की दूरी पर है। डॉ. अम्बेडकर और श्री सहस्त्रबुद्धे के जाने के बाद श्री शिवतरकर और प्रधान बंधुओं ने वहां इकट्ठा हुए सत्याग्रहियों को डॉ. साहेब की हिदायतें ध्यान में रखने की विनती की। पांच लोगों की कतार बना कर उपस्थित लोगों की मानो सेना बना दी। इस प्रचंड थल सेना का जुलूस हर हर महादेव, महाड़ सत्याग्रह की जय आदि घोषणाएं करते हुए निकली।