17. महाड सत्याग्रह परिषद - दिसंबर 1927 महाड - Page 118

101 दिनांक 26 दिसंबर, 1927

सुबह 10 बजे जाति की अंतर्व्यवस्था में सुधार लाने के बारे में प्रस्ताव। बाद में पूरी परिषद तालाब पर जाकर पानी भर कर ले आएगी। दोपहर साढ़े बारह बजे भोजन। उसके पश्चात् तीन बजे सार्वजनिक प्रस्ताव और फिर एक बार कांफ्रेंस में उपस्थित सभी लोग चवदार तालाब पहुंचकर वहां से पानी भर कर लाएंगे। साढे़ सात बजे अल्पाहार। बाद में कीर्तन और सत्यशोधक नाट्य प्रदर्शन उसके बाद परिषद को बरखास्त किया जाएगा। केवल 250 लोग रुके रहेंगे और वे 2 जनवरी, 1928 तक पानी भरने का कार्यक्रम जारी रखेंगे। विशेष सूचना

इस अवसर पर बेहद विनम्रता से और शांतिपूर्वक बर्ताव करने की सत्याग्रह कमेटी की विनती है। सत्याग्रह के लिए आए लोगों को उम्मीद है कि वे हालात कैसे भी क्यों न हों, लोगों को उम्मीद है कि वे हर हाल में शांतिभंग नहीं होने देंगे।

आपका विनम्र

सीताराम नामदेव शिवतरकर

सचिव, सत्याग्रह कमेटी

मुंबई के लोग समय से महाड पहुंच नहीं पाए थे इसलिए और कुछ अन्य कारणों से परिषद के तय कार्यक्रमों में फेर-बदलाव करना पड़ा लेकिन तय कार्यक्रमों पर एक नजर डालने के बाद पता चलता है कि मनुस्मृति को जलाने का कार्यक्रम ऐन समय पर नहीं बनाया गया था। बाद में किए गए बदलावों के अनुसार शाम करीब 4 बजे कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। शुरुआत में बच्चों ने ईशस्तवन गाया। उसके बाद सत्याग्रह कमेटी के सचिव श्री शिवतरकर ने श्री श्रीधर बलवंत तिलक, डॉ. पुरुषोŸाम सोलंकी, एम.एल.सी. के सहानुभूति व्यक्त करने वाले तार और पत्र पढ़ कर सुनाए। उसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कमेटी के अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपना भाषण पढ़ कर सुनाया।

उन्होंने अपने भाषण में कहा,

सद्गृहस्थों! सत्याग्रह की कमेटी के आमंत्रण का आदर करते हुए आप लोग आज यहां आए इसके लिए कमेटी के अध्यक्ष के नाते मैं आप सबका स्वागत करता हूं।

आप में से कइयों को याद होगा कि आप सब मिल कर पिछले मार्च महीने की 19 तारीख को यहां उपस्थित होकर महाड़ के चवदार तालाब पर पानी पीने पहुंचे