17. महाड सत्याग्रह परिषद - दिसंबर 1927 महाड - Page 121

104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को फ्रेंच राष्ट्रीय सभा ने जो कार्य किया है, उसका सही मर्म समझ नहीं आया, यही कहना पडे़गा। ऐसा नहीं कि इस सभा के कारण केवल फ्रांस का ही कल्याण हुआ हो, पूरे यूरोप का कल्याण हुआ है। आज यूरोपीय राष्ट्रों के पास सुख-समृद्धि यदि है तो उसकी एक मात्र वजह यह है कि 1789 में हुई क्रांतिकारी फ्रेंच राष्ट्रीय सभा ने सामाजिक संगठन के जो सिद्धांत अस्त-व्यस्त और निर्माल्यस्वरूप हुए थे उसे पुनः फ्रेंच राष्ट्र के सामने रखे और जबरदस्ती उन पर थोपे गए और वे ही सिद्धांत यूरोप ने माने और उनके अनुसार आचरण में लाने का कार्य किया।

इस फ्रेंच राष्ट्रीय सभा का महत्व और उसके सिद्धांतों की महŸा उपयोगिता समझने के लिए तत्कालीन फ्रेंच समाज की स्थितियों को जानना जरूरी है। हमारा हिंदू समाज वर्णाश्रम धर्म के आधार पर बना है, यह हम सब जानते हैं। सन् 1789 में इसी तरह की वर्णाश्रम व्यवस्था फ्रांस में भी थी। फर्क सिर्फ इतना था कि फ्रेंच समाज केवल तीन वर्णों तक सीमित था। हिन्दुओं के समान फ्रेंच समाज में भी ब्राह्मण वर्ण था। क्षत्रिय वर्ण भी था। हालांकि फ्रेंच समाज में वैश्य और शूद्र और अतिशूद्र इस तरह अलग अलग वर्ण किए बिना इन तीनों को मिला कर एक तृतीय वर्ण बनाया गया था। यह फर्क बहुत ही गौण है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हिंदू समाज और फ्रेंच समाज इन दोनों समाजों में वर्णव्यवस्था एक-सी थी। वर्णव्यवस्था के कारण दो वर्णों के बीच पैदा होने वाली भिन्नता ही इन दो समाजों की समानता नहीं थी तो वर्ण व्यवस्था के बीच में होने वाली असमानता भी एक-सी थी। फ्रांस में असमानता का स्वरूप थोड़ा अलग था। वहां वर्णों के बीच असमानता थी, और वह बेहद ज्यादा थी। ध्यान में रखने वाली बात यह है कि आज यहां हो रही इस सभा में और 5 मई, 1789 को फ्रांस के वरसाय में हुई फ्रांसिसी लोगों की क्रांतिकारी राष्ट्रीय सभा में बहुत अधिक समानताएं हैं।

उनकी आपसी स्थितियों में समानताएं दिखाई देती हैं। इतना ही नहीं तो उनके उद्देश्य में भी काफी समानता है। फ्रांसिसी समाज के बीच संगठन खड़ा करने के लिए यह सभा बुलाई गई थी। आज की यह सभा हिंदू समाज का संगठन करने के लिए बुलाई गई है। अर्थात् यह संगठन किन सिद्धांतों के आधार पर खड़ा किया जाए इस बारे में विचार-विमर्श करने से पहले फ्रांसिसी लोगों की सभा ने फ्रांस देश का संगठन बनाने के लिए कौन-सी नीति अपनाई और किन सिद्धांतों का आधार लिया गया, इस बारे में हम सबको जानना जरूरी है। उस फ्रांसिसी सभा का कामकाज हमारी आज की सभा के कामकाज से बहुत विस्तृत था। फ्रांसिसी लोगों की इस सभा को राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर तीन पहलुओं वाला संगठन बनाना था। हमें सिर्फ सामाजिक और धार्मिक संगठन कैसे बनेगा इस बारे में सोचना आवश्यक है। फिलहाल राजनीतिक संगठनों से हमें कुछ लेना-देना नहीं है। धार्मिक