116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रस्ताव के प्रस्तुतकर्ता - डॉ. कोंडीराम खोलवडीकर
अनुमोदक - श्री सुबेदार घाटगे
पुष्टि की - डॉ. निर्मल गंगावणे
दोबारा अनुमोदन दिया - धोंडिराम नारायण गायकवाड़
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परिषद की राय है कि -
(1) धर्माधिकारी की संस्था को लोगों के मतों के अनुसार चलने वाली और
लोगों द्वारा नियुक्त की जाने वाली बनाई जाए।
(2) इस पेशे को स्वीकारने को तथा उसके लिए खुद को लायक बनाने का
हक और अवसर हर हिंदु को मिले।
(3) धर्माधिकारियों की परीक्षा ली जाए और तदुपरांत उन्हें प्रमाण-पत्र दिए जाएं।
प्रमाण-पत्र न मिलने वाले किसी भी व्यक्ति को धर्माधिकारी कहलाने की
अथवा उससे संबंधित विधि-कर्म करने की कानूनन मनाही की जाए।
(4) ग्राम धर्माधिकारी, तहसील धर्माधिकारी और प्रांत धर्माधिकारी इस तरह
धर्माधिकारियों की योजना की जाए।
(5) ऊपर बताए अनुसार नियुक्त किए गए अधिकारी को धार्मिक विधियां पूरी
करने के लिए दक्षिणा या अन्य तरह का मेहनताना या पुरस्कार देने का
अधिकार न हो। उसकी जगह सभी विभागों के अधिकारी वर्ग के अनुसार
इस विभाग के छोटे बडे़ अधिकारियों को भी सरकारी नौकर माना जाए,
और उन्हें सरकार की तरफ से योग्य वेतन दिया जाए।
प्रस्ताव प्रस्तुतकर्ता - रा. पतित पावन दास बुवा
अनुमोदन किया - रा. गिरिजाशंकर शिवदास
पुष्टि की - रा. चावरे मास्तर,
दोबारा अनुमोदन दिया - रा. राघो नारायण वनमाली
इस प्रस्ताव पर बेहद विचारोŸोजक और मन को बांध लेने वाले भाषण हुए। ख्1,
सत्याग्रह सभा में मनुस्मृति की दहनभूमि तैयार करने के लिए दो दिनों से छह कारीगर मेहनत कर रहे थे। छह इंच गहरा और करीब डेढ फीट चौडा और लंबा गड्ढा खोद कर उसे चंदन की लकडि़यों से भर दिया गया। चार कोनों में चार
1.”बहिष्कृत भारत“, 3 फरवरी, 1928