17. महाड सत्याग्रह परिषद - दिसंबर 1927 महाड - Page 135

118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

काम को करना पड़ रहा है। मैंने उनसे कहा, कि मैं खुद सत्याग्रह करने का निश्चय करके आया हूं। मैं अपने निश्चय से डिगूंगा नहीं, और सत्याग्रह करने वाले लोगों को मैं सत्याग्रह करने की ही सलाह दूंगा। लेकिन सत्याग्रह के लिए आए लोगों पर मैं अपनी राय थोपूंगा नहीं। न उन पर दबाव आने दूंगा। लेकिन स्थगनादेश आया है, इसलिए आप सत्याग्रह न करें ऐसा भी मैं उनसे नहीं कहूंगा। इस पर कलक्टर साहब ने इच्छा जताई कि सत्याग्रह करने की बात अगर बहुमत से साबित हुई तो वहां इकट्ठे लोगों से सदुपदेश के दो शब्द कहने की इजाज़त मुझे दी जाए। मैंने उन्हें वचन दिया है कि उन्हें आपके सामने दो शब्द कहने की इजाजत दी जाएगी। इससे अधिक मैंने और कोई बंधन स्वीकार नहीं किए हैं। इसलिए आपको जो तय करना है उसे तय कर लें। इसमें एक बात का ध्यान रखना होगा। हमेशा के लिए अगर हित हो रहा है, तो कुछ समय तक तकलीफें और क्लेष तो सहने ही पड़ेंगे। कठोर तप के बगैर वरदान मिला हो, इसका हमारे इतिहास या पुराणों में कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। हमेशा दुःख के बाद ही सुख की प्राप्ति होती है। इसलिए अगर मनाही का आदेश तोड़ने के बाद जेल में जाने की नौबत आई, तो भी डिगना नहीं चाहिए। स्थगनादेश इस्तेमाल के आधार पर दिया गया है। इस्तेमाल न्यायपूर्ण है अथवा अन्यायपूर्ण यह भी देखना पडे़गा। वरना कोर्ट का आदेश पालन करने की कोशिश में जिस अन्याय के खिलाफ हम लड़ रहे हैं, उसी अन्याय को सहने की नौबत आ जाएगी। सत्याग्रह कठोर तपस्या ही है। सत्याग्रहियों को मन पर काबू रखना पडे़गा, बेहद तकलीफें झेलनी पडे़गी, खुद होकर अपनी गर्दन किसी के हाथ खुशी से सौंपनी होगी। आप लाठियां लेकर सत्याग्रह करने नहीं जा सकते। अधिकारियों की किसी भी आज्ञा को टाल नहीं सकेंगे। सत्याग्रह को जाते समय सरकारी अधिकारी पकड़ कर हवालात में बंद कर देते हैं, तब भी माफी नहीं मांगनी चाहिए। आखिर तक यही कहते रहना चाहिए कि हमने जो किया, वही सही था। कुल मिला कर (1) लाठियां नहीं रखना, (2) सरकार की आज्ञा का पालन करना, (3) जेल जाने की तैयारी रखना, (4) सरकार से माफी नहीं मांगना - इन शर्तों का आपको दृढ़ता से पालन करना होगा, तभी सत्याग्रह में शामिल होने का फायदा है। केवल मैं कह रहा हूं, इसलिए आपका सत्याग्रह में शामिल होना सही नहीं होगा। अपना मार्ग न्याय का मार्ग है, यह अगर आपको लगता हो, उस पर आपका यकीन हो और कई संकटों का सामना करने के लिए आप तैयार हों, तो ही आप सत्याग्रह करें।“

प्रस्ताव के बारे में इस तरह का भाषण देने के बाद डॉ. अम्बेडकर ने बताया कि जो पक्ष-विपक्ष में भाषण होंगे उन्हें शांति से सुनें, और फिर जो ठीक लगे उसके अनुसार निर्णय लें। इसके बाद एक पक्ष में और एक विपक्ष में इस क्रम से लोगों के भाषण हुए। उसमें सत्याग्रह के पक्ष में भाषण करने वालों के नाम इस प्रकार हैं -