119
पùनाथ राजाराम हाटे
पांडुरंग बाबाजी मांडलेकर
धोंडिराम गायकवाड
पांडुरंगजी नाथुजी राजभोज
भिकाजी महादू पेन्शनर
भांबू गणू श्ेणवलीकर
सोनू देवजी खांबोलीकर
हिरू बारकू शेलार
गोविंदबुवा मालखेडकर
भिवबा भोवडकर
गिरजा शंकर शिवदास
गणू धर्मा अंबोलीकर
निम्नांकित लोगों ने प्रतिकूल विपक्ष में भाषण दिए-
शिवराम सखाराम हाटे
कृष्णा येसू
गाडगेबुवा साहेब
गोविंद हवालकर
राघू आनंदा शिवतरकर
राघो नारायण वनमाली
पुंजाजी नवसाजी जाधव
एन. टी. जाधव
ध्यान देने योग्य बात यह है कि सत्याग्रह करने के लिए कोलली के रहने वाले केवल एक ही मराठा वयोवृद्ध रा. रा. विसोबा महादेव वाडवल ही आए थे। पक्ष-विपक्ष में हुए भाषणों के बाद वह खड़े हुए और उन्होंने कहा कि, ”मैं मराठा हूं। मेरे गांव के महार बंधू रूठे हुए हैं। वे गांव में नहीं आते। गांव की सीमा रंडकी हुई है। अब हमें उससे क्या फायदा? हमारे महार बंधुओं का पानी का हठ है। हमें वह पूरा करना ही होगा। इसलिए मैं सत्याग्रह करने के लिए आया हूं।“
इन वक्ताओं के भाषणों का क्या असर होना है, इस विषय को लेकर किसी के मन में कोई आशंका नहीं थी। अगर किसी के मन में आशंका हो तो उसे दूर करने में रŸा भर का समय नहीं लगता। क्योंकि, सत्याग्रह के पक्ष में बोलने वाले वक्ता को लोग बोलने देते थे, लेकिन विपक्ष में बोलने वाले को मुंह ही नहीं खोलने देते थे। बात यहां तक पहुंची कि डॉ. अम्बेडकर को कहना पड़ा कि, आप विपक्ष