122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
फौजदार आदि लोग सभा स्थल पर पहुंचे। डॉ. अम्बेडकर ने कहा, ”शाम को जैसा कि मैंने आपको बताया था कलक्टर साहब आपसे दो शब्द कहना चाहते हैं। अब वे सभा में पहुंच चुके हैं। मैं उनसे विनती करता हूं कि वे अपनी राय यहां व्यक्त करें। उसके बाद कलक्टर साहब ने मराठी में इस प्रकार का भाषण दिया -
”अध्यक्ष साहब ने आपको बता ही दिया है कि मैं यहां किसलिए उपस्थित हुआ हूं। मैं मराठी नहीं जानता इसलिए आपसे माफी मांग रहा हूं। पिछले तीन-चार महीनों से आप सत्याग्रह की तैयारी कर रहे हैं यह मैंने सुना हुआ है। इसलिए अगर मैं कहूं कि आप सत्याग्रह नहीं कर सकते, तो यह सुनकर आपको बुरा लगेगा। इसी बारे में आपको उपदेश देने की मेरी इच्छा है। मुंबई लेजिस्लेटिव कौंसिल का प्रस्ताव स्कूल और सार्वजनिक तालाब, कुओं को छूने देना चाहिए ऐसा है। उसके अनुसार मुंबई सरकार ने आदेश दिया और म्युनिसिपालिटी लोकल बोर्ड को सूचित किया कि अस्पृश्य लोगों को मना नहीं किया जाए। सरकार के आदेशानुसार आपकी इच्छा चवदार तालाब पर जाने की है। अगर इस पर आपिŸा नहीं की गई होती तो हम आपको इजाजत दे देते। लेकिन दस-बारह स्पृश्य लोगों ने दीवानी अदालत में दावा किया है कि यह तालाब निजी है। मैं यह नहीं बता सकता कि तालाब निजी है या सार्वजनिक। लेकिन कागजातों को देख कर और वकीलों को सुन कर न्याय किया जाएगा। अगर तालाब निजी है तो स्पृश्यों द्वारा आपिŸा उठाना ठीक है। लेकिन अगर वह निजी नहीं है, तो किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट का जब फैसला आएगा बात तभी तय की जा सकती है। दूसरी बात कोर्ट से अस्थाई आदेश मिलने के बाद कोर्ट का फैसला आने तक कोर्ट का आदेश पालन कर चवदार तालाब पहुंचना नहीं है। आज आपको मेरा यही उपदेश है कि आपको कोर्ट का आदेश मान लेना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि कोर्ट का आदेश न मानने से आपको फायदा मिलेगा। मुझे पता है कि दो चार महिनों से आप लोगों ने तैयारी की है, और आप लोगों ने तय किया है कि तालाब में जाना चाहिए। लेकिन सयाना आदमी हमेशा कानून के अनुसार ही बर्ताव करता रहता है। आप जानते हैं कि जो लोग आपके खिलाफ थे, उन्होंने कानून को तोड़ा और उन्हें सजा भुगतनी पड़ रही है। उसी तरह अगर आप कानून के अनुसार नहीं चलेंगे तो आपको भी तकलीफ होगी, और सजा मिलेगी। कोई फायदा नहीं होगा। आप तालाब में जाना चाहते हैं और हम आपको रोकेंगे। आप जानते हैं कि मैं जिले का कलक्टर हूं। आपकी
खातिर बोल रहा हूं। यहां दो पक्ष हैं। एक तरफ स्पृश्य लोग, दूसरी तरफ अस्पृश्य लोग। सरकार किसकी तरफ है? वह अस्पृश्य लोगों की तरफ है। आप अगर आदेश नहीं मानते और सरकार की अवमानना करते हैं, तो उसका विपरीत असर होगा। आप ध्यान में रखें कि मैं आपका दोस्त हूं। और सरकार आपकी माई-बाप है। आज