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खेद के साथ सुन रहा हूं कि आपसे कहा जा रहा है कि सत्याग्रह करना ही होगा। सरकार की अवमानना कर तालाब पर जाना ही होगा। याद रखिए इस तरह की सलाह देने वाले आपके हित चिंतक दोस्त नहीं हैं। वे आपके झूठे दोस्त हैं। यह काम शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से करना होगा, इसलिए धैर्यपूर्वक विवेक से व्यवहार करें। कानून के अनुसार कोर्ट में केस चल रहा है। आपके पक्ष में निर्णय होगा तो तालाब सबके लिए खुलेगा। खिलाफ हुआ तो आप कोर्ट में अपील करें। तब तक किसी और सार्वजनिक तालाब पर सत्याग्रह कीजिए। अब आप कानून और सरकार के खिलाफ बर्ताव न करें। इससे आपको कोई फायदा नहीं मिलेगा, उल्टे नुकसान ही होगा। इस बारे में एक कहानी सुनाता हूं। दो भाई हैं। एक हरि, और दूसरा भाऊ। हरि ने कहा - गर्मी का मौसम खत्म होने पर धान बोएंगे। भाऊ ने कहा, सभी तैयारी होने के बाद धान बोएंगे। हरि ने हड़बड़ी कर धान बोया। और भाऊ ने जमीन बुवाई के लिए तैयार करने के बाद धान बोया। सोचिए कि किसे अच्छी फसल मिली होगी? इसी प्रकार आप भी सोच-समझ कर काम करेंगे तो आपको जीत मिलेगी। अब हड़बड़ी करते हुए सरकारी आदेश के खिलाफ काम करेंगे, तो इस कहानी में बताए गए उदाहरण की तरह आपकी हालत होगी। फिर आप कहेंगे कि अब हम सत्याग्रह के लिए इकट्ठा हुए हैं। इसलिए आपने जो कार्यक्रम बनाया है उसे इस तरह बनाइए कि सत्याग्रह अब शुरू होगा और जब तक विजय मिलती नहीं, जब तक अस्पृश्य लोगों के लिए चवदार तालाब खुलता नहीं, तब तक हम सत्याग्रह जारी रहेगा। फिर आपके अध्यक्ष साहब बैरिस्टर हैं। उनके साथ बातचीत कर सबूत के लिए साक्ष्य बना लीजिए। साथ ही इस काम के लिए धन की जरूरत होगी। उसकी तैयारी कीजिए। आखिर में एक बात बताना चाहूंगा। बारह सालों से इस तहसील के महारों को मैं जानता हूं। मैं जानता हूं कि वे अच्छे लोग हैं, सरकारी नौकरी में हैं। ऐसे भी कई लोग हैं, जिन्होंने सेना में नौकरी की है। सुभेदार, हवलदार, जमादार, सिपाही आदि पदों पर वे तैनात रहे हैं। जिन्होंने सरकार की नौकरी की वे सरकार का अपमान करेंगे, ऐसा नहीं लगता। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि जब तक फरियाद का फैसला नहीं आता, तब तक तालाब के सत्याग्रह का काम छोड़ दीजिए। ऐसा नहीं करेंगे तो नुकसान आपका ही है। आप जानते हैं कि हमने पुलिस का पक्का बंदोबस्त किया है। तालाब में जाने की जगह ही नहीं है। फिर भी आपने कोशिश की तो स्पृश्य लोग और सरकार दोनों आपके खिलाफ होंगे। इससे कोई फायदा नहीं है। थोड़ा रुकिए। आपके नेता समझदार हैं। उन्हें कोर्ट के बारे में जानकारी है। उनके साथ काम कीजिए। आपका काम बन जाएगा। फैसला आपकी तरफ से होगा। फिर कोई हर्ज नहीं होगा। आपके फायदे के लिए मैं यह उपदेश दे रहा हूं। जो कुछ कहा उसे अपने दोस्त द्वारा दी गई समझ मान कर उस पर अमल करेंगे ऐसी उम्मीद करता हूं।“