124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बाद में अध्यक्ष की इजाजत से श्री जवलकर ने कहा, ”सुबह आए हैं तब से हम महाड के सभी मराठी नेताओं से मिले। उनमें से हर किसी ने बताया कि वे अस्पृश्यों के खिलाफ नहीं जाएंगे। सबूत के तौर पर उन्होंने मुझे एक घोषणा-पत्र लिख कर दिया है। वह इस प्रकार है -
श्री केशवराव जेधे और दिनकरराव जवलकर को
महाड दिनांक 26-12-1927
हमारा आगे दिया जा रहा कथन- महाड मराठा समाज की राय - अस्पृश्य समाज के सामने रखें।
महाड़ चवदार तालाब पर सत्याग्रह करने के लिए यहां बडी संख्या में अस्पृश्य समाज स्वोन्नति की कोशिष कर रहा है। कुछ अन्य जातियों के गैर-जिम्मेदार लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि मराठा लोग उनके खिलाफ हैं। ये अफवाहें पूरी तरह निराधार हैं। हम महाड के मराठे, मराठा समाज के नेता के नाते आपको सूचित कर रहे हैं कि अस्पृश्य अपने मानवता के हक पाएं। मराठा समाज उनकी राह में अडंगे नहीं डालेगा। उल्टे, अस्पृश्यों की कोशिशों के बारे में हमारे मन में बहुत सहानुभूति है। हालांकि अगर कानूनी राह से अपनी कोशिशें जारी रखेगा तो हमें लगता है कि अस्पृश्य समाज का तुरंत कल्याण होगा।
सत्याग्रह के बारे में हम स्थिरप्रज्ञ रहेंगे, इस आशय का प्रस्ताव हमने 21 दिसंबर, 1927 को ही पारित किया है।
तालाब के संदर्भ में जिन 9 लोगों ने कोर्ट में फरियाद दाखिल की है उनमें से केवल एक व्यक्ति मराठा है। उन्होंने फरियाद दाखिल कराने में शामिल होने में पहले मराठा समाज की सहमति नहीं ली थी और उन्होंने जो कुछ किया है उसके लिए मराठा समाज की बिल्कुल सहमति नहीं है।
हस्ताक्षर
नारायण मामा मांगडे, पेंटर
कोंडीराम पांडुरंग शिंदे
किसन बाबा धुमाल
तुकाराम सावलाराम पानसरे
कृष्णाजी ग्यानबा पवार
बाबाजीराव माधवराव दलवी
सीताराम गोपाल चौधरी
इससे आप पाएंगे कि मराठा वर्ग आपके खिलाफ नहीं है। हालांकि, गैर-ब्राह्मण पार्टी का कहना है कि फरियाद का निर्णय होने तक सत्याग्रह रोकना ही सही होगा।