17. महाड सत्याग्रह परिषद - दिसंबर 1927 महाड - Page 143

126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकर ने यह जिम्मेदारी अपने सिर पर ली।

तीसरे दिन सुबह जब परिषद की शुरुआत हुई तब डॉ. अम्बेडकर ने आगे दिया हुआ प्रस्ताव सभा के पटल पर रखा -

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जो स्पृश्य हिंदू लोग चवदार तालाब का पानी अस्पृश्य लोगों को भरने नहीं देते हैं, उनके खिलाफ सत्याग्रह करने के लिए सभा बुलाई गई। तब स्पृश्य हिंदुओं ने दीवानी कोर्ट में फरियाद दाखिल कर अस्पृश्यों के तालाब प्रवेश के खिलाफ अस्थाई स्थगनादेश हासिल किया और इस तरह सभा को सरकार के खिलाफ सत्याग्रह करने का आदेश हासिल किया और इस सभा को सरकार के खिलाफ सत्याग्रह करने की मुश्किल समस्या का पेच खड़ा कर डाला। इस बात को ध्यान में रखते हुए तथा कलक्टर साहब ने अपने भाषण में जो आश्वासन दिया था कि, इस मामले में सरकार का कोई दुराग्रह नहीं है। और समान अधिकार पाने के लिए चली अस्पृश्यों के अधिकारों की लड़ाई में उनके प्रति सरकार को पूरी सहानुभूति है। इसके बारे में खयाल कर यह परिषद दीवानी न्यायालय की फरियाद का निर्णय आने तक सत्याग्रह को स्थगित करने का निर्णय लिया जा रहा है। सभा के सामने प्रस्ताव रखते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा,

कल ही मैंने प्रस्ताव रखा कि सत्याग्रह कीजिए। और आज मैं खुद सत्याग्रह को कुछ दिनों के लिए स्थगित किए जाने का प्रस्ताव रख रहा हूं। इसलिए आपको लगेगा कि मैं चंचल मानसिकता वाला इंसान हूं। असल में ऐसी कोई बात नहीं है। दोनों बातों पर पूरी तरह गौर करने के बाद ही मैं कह रहा हूं। कल मैं देखना चाह रहा था कि आप लोगों में कितना निश्चय है। मुझे इसका अंदाजा हो गया। आपका निश्चय पक्का है इस बारे में अब मुझे कोई शक नहीं। इस बात से मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं। दृढ़ संकल्प की कमी ही अब तक आपकी सबसे बड़ी कमी थी। आपने उस कमी पर विजय प्राप्त कर ली है। अब सत्याग्रह नहीं करने के बारे में मैं जो आपसे कह रहा हूं, वह भी मैं पूरी तरह से सोचने-समझने के बाद ही कह रहा हूं। बदन में शक्ति का संचार हुआ तो जरूरी नहीं कि तुरंत उसका प्रयोग किया जाए। शक्ति का इस्तेमाल करना हो तो सही समय का इंतजार करना उपयुक्त होता है। सोचने के बाद मुझे भी यह बात सही लगी है कि आज हमें इस शक्ति का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आज अगर हम सत्याग्रह करते हैं तो वह सरकार के खिलाफ साबित होगा। सरकार अगर दुराग्रह करे तो सरकार के खिलाफ सत्याग्रह करने में भी कोई हर्ज नहीं है। लेकिन पहले पता करना है कि क्या सरकार दुराग्रह कर रही है? सोचिए इस बारे में। सरकार की सहानुभूति हमारे साथ है। फिर बिना वजह