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हम सरकार को क्यों मुश्किल में डालें? दूसरी बात यह कि हमारे सत्याग्रह के लिए स्पृश्य लोगों की जरा भी सहानुभूति नहीं है। आप लोग भी यह बात देख रहे हैं। स्पृश्य लोग हमारे साथ पूरी तरह असहकर कर रहे हैं। व्यापारियों ने बाजार बंद रखे हैं। जमींदार ने हमसे खेती छीनने का कार्यक्रम बनाया है। कुणबियों ने हमारे जानवरों को कांजीहाऊस में डालना शुरू किया है। हमें इस जोर-जबर्दस्ती से बच कर निकलना है। और इसमें हमें सरकार की सहायता की जरूरत है। सरकार सहायता का आश्वासन दे रही है। ऐसे में हम सरकार के खिलाफ सत्याग्रह करें यह अनुचित होगा। ऐसा अगर कुछ लोग कहते हैं, तो वे गलत कह रहे हैं, ऐसा कोई नहीं कह सकता। सो आप इस अवसर पर मेरी बात मानें और इस प्रस्ताव को सहमति दें। लोग आप पर हंस नहीं सकते। खुद कलक्टर साहब आपसे विनती कर रहे हैं। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि आप डरपोक हो इसलिए आपने सत्याग्रह स्थगित किया। बहुत हुआ तो नीचा दिखाने के लिए कहेंगे कि आपके नेता पलट गए। लेकिन आप इस बारे में बुरा न मानें। मुझे इसका बिल्कुल बुरा नहीं लगता, क्योंकि अगर मैं पीछे हट भी रहा हूं तो केवल आपके भले की सोचकर। मेरे अनुयायी मुझसे चार कदम आगे पहुंचे यह मेरे लिए खुशी और गौरव की बात है। आज मैं कह रहा हूं कि सत्याग्रह को स्थगित करो, लेकिन आप ही की तरह मेरा भी निश्चय है कि तालाब को काबिज किए बगैर जाना नहीं है। यह निश्चय पूरा होने तक मैं चुप नहीं बैठूंगा, यह बात अपने मन में पक्की कर लें।“
डॉ. अम्बेडकर के इस भाषण को सुनकर सत्याग्रही लोग बहुत निराश हुए। इसके बावजूद सभी ने डॉ. अम्बेडकर की बात का सम्मान करते हुए उनके प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।
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प्रस्ताव के बाद वहां इकट्ठा हुए प्रतिनिधियों का शहर में बड़ा जुलूस निकला। इसमें सबसे आगे मुंबई से आए 50 स्वयंसेवक थे। इसके बाद सम्मेलन में हिस्सा लेने आई 50 महिलाएं थीं। उनके बाद चार-चार की कतार में एक के पीछे एक सभी प्रतिनिधि शामिल हुए थे। बीच-बीच में सूक्तियां लिखीं तख्तियां हाथों में लेकर लोग चल रहे थे। पिछले मार्च महीने में अस्पृश्य लोगों ने तालाब को अपवित्र किया, इसलिए महाड़ के सारे अस्पृश्य लोग धर्मवीर बने थे और वे जेल गए थे। अब कोर्ट का स्थगनादेश आने पर तो उन्हें तो छाती फुलाकर चलना चाहिए था। लेकिन सबने अपने घर के दरवाजे बंद कर लिए थे। महिलाओं और बच्चों की बात तो छोड़ ही दीजिए, पुरूष भी रास्ते पर नहीं दिखाई दे रहे थे। नेता लोग तो दुम दबाकर गांव से भाग खड़े हुए थे। एक भी नेता गांव में नहीं था। कोर्ट का स्थगनादेश आने के कारण थोड़े समय