128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लिए सरकार उनके तरफ से थी। फिर भी महाड़ के लोग इतने दीन-हीन कैसे बन गए थे, इसका सभी को अचरज हो रहा था। यह एक पहेली थी कि शेर के बच्चे बिल्ली के पिल्ले कैसे बन गए। विशाल जुलूस महाड़ के बाजार से होकर निकलते देखने के बाद पहले से डरे हुए महाड़ के लोग और बौखला गए।
महाड़ शहर के लिए इस तरह का जुलूस देखने का यह पहला मौका था। जार्ज पंचम की जय, लोकहितवादी की जय, एकनाथ महाराज की जय आदि नारों से सारा शहर गूंज रहा था। जुलूस बाजार से गुजरते हुए चवदार तालाब के मोड़ पर आया। वहां लंबाई में जुलूस को इस तरह विभाजित किया गया कि आधा जुलूस तालाब के एक तरफ और आधा दूसरी तरफ ले जाया गया। दूसरे छोर पर फिर ये दोनों सिरे मिल गए और जुलूस एक हो गया और आगे वह सभा मंडप के पास पहुंचा। इस तरह तालाब को चारों तरफ से जुलूस ने घेर लिया। यह देखकर गांव वाले आपस में करुण स्वर में कह रहे थे कि अब तालाब से पानी लेने में क्या कसर रह गई है। ऐसे उद्गार निकलना स्वाभाविक भी था। कंधों पर लाठी लेकर चलकर आते लोगों का यह जुलूस शिवाजी की मावलों की सेना की याद दिला रहा था। जुलूस इतना लंबा था कि अगला वाला सिरा जब लौटकर मंडप तक पहुंचा तब तक पिछले सिरे के लोग मंडप के पास ही थे।जुलूस पूरा होने पर जब लौटे तब एक बार फिर सभा आरम्भ हुई। शिवतरकर जी ने यह प्रस्ताव लोगों के सामने रखा -
धन्यवाद प्रस्ताव :
| èk | U; | o | kn |
|---|
| zLr | ko |
|---|
इस सम्मेलन को सफल बनाने में जिन अस्पृश्य लोगों ने मदद की उनके प्रति और खासकर इन सज्जनों के प्रति यह सभा कृतज्ञतापूर्वक आभार प्रकट करती है। 1. अ. वि. चित्रे, 2.सुरेंद्रनाथ टिपणिस, 3. फŸोखानसाहब मुठोलीकर, 4. शांताराम रघुनाथ पोतनीस, 5. केशवराव देशपांडे, 6. ग. नि. सहस्त्रबुद्धे।
इस प्रस्ताव पर श्री पाडुरंग नाथुजी राजभोज, श्री मोरे, श्री वनमाली आदि लोगों ने भाषण दिए। इस प्रकार धन्यवाद का यह प्रस्ताव तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पारित हुआ। उस पर श्री अनंतराव चित्रे और सहस्त्रबुद्धे ने जवाबी भाषण दिए। उसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने बताया कि सभा का कार्यक्रम अब खत्म हुआ, फिर भी अन्य कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में विचार करना बाकी है। जब तक उन पर विचार नहीं होता, मैं यह नहीं कह पाऊंगा कि सम्मेलन खत्म हुआ। अब चूंकि काफी समय हो गया है, इसलिए इस विचार-विमर्श को शाम तक के लिए टालना जरूरी हो गया है। इसलिए आप सबसे मेरी यह विनति है कि आप घर न जाकर शाम की बैठक में उपस्थित हों। इस प्रकार अध्यक्ष के भाषण के साथ सभा का काम दोपहर एक बजे संपन्न हो गया।