19. अस्पृश्यों की उन्नति और महिलाओं की जिम्मेदारी - दिसंबर 1927 महाड - Page 151

134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लेकिन अस्पृश्य लोगों के जो रीति-रिवाज हैं, उनके कारण लोग ठीक पहचान लेते हैं कि फलां व्यक्ति अस्पृश्य है। मेरी राय में किसी जमाने में ये रीति-रिवाज हम पर लादे गए थे, लेकिन अंग्रेज सरकार के राज में इस प्रकार की जबरदस्ती नहीं की जा सकती। इसीलिए, हमारे अस्पृश्य होने की बात की पहचान देने वाली सभी आदतों-बातों का हमें त्याग करना होगा। आपका साड़ी पहनने का तरीका आपके अस्पृश्य होने की पहचान है। इस साक्ष्य को आपको मिटाना होगा। ऊंचे वर्ग की महिलाएं जिस अंदाज से साड़ी बांधती हैं, आप भी उसी तरह साड़ी बांधना शुरू कर दें। इसमें आपको अपनी जेब से कुछ खर्च नहीं करना पडे़गा। इसी प्रकार, गले में कई प्रकार के अलंकार और हाथ में कोहनी तक रांगे के या चांदी के अलंकार भी आपकी पहचान बता देते हैं। गले में एक से अधिक अलंकारों की जरूरत नहीं। ऐसा नहीं कि उससे पति की उम्र बढ़ती हो या आपकी सुंदरता खिलती हो। अलंकारों से अधिक सुंदरता कपड़ों से आती है। इसीलिए रांगे के या चांदी के अलंकारों पर पैसे खर्चने के बजाय अच्छे कपडे़ खरीदने में पैसा खर्च करो। अलंकार पहनना ही हो तो सोने का बनवाकर पहनें। और अगर वह संभव न हो तो अलंकार न पहनें। इसी प्रकार साफ-सफाई का भी खयाल रखें। आप गृहलक्ष्मी हैं, घर में कोई भी अमंगल काम न होने देने के प्रति आप जागरुक रहें। पिछले मार्च महीने से सब ने मरे हुए जानवर का मांस खाना बंद किया है, यह बहुत आनंद की बात है। लेकिन अगर अभी भी किसी घर में इसकी शुरुआत नहीं हुई हो तो उसे शुरू करने की जिम्मेदारी आपको उठानी होगी। अगर पति मरे हुए जानवर का मांस घर में लाए तो उससे आप साफ-साफ कह दीजिए कि ऐसा मेरे घर में नहीं चलेगा। मुझे यकीन है कि अगर आप ठान लें तो यह होकर रहेगा। साथ ही आपको अपनी बेटियों को शिक्षा देनी होगी, उन्हें पढ़ाना होगा। ज्ञान और विद्या केवल पुरुषों के लिए नहीं हैं। महिलाओं के लिए भी वे जरूरी हैं। हमारे पूर्वजों ने यह बात पहले ही जानी थी। इसीलिए सेना में भर्ती हमारे पूर्वजों ने अपनी बेटियों की पढ़ाया। वरना वे अपनी बेटियों को पढ़ाते नहीं। जो बोओगे वही पाओगे इस बात को ध्यान में रखते हुए आप अगर अपनी अगली पीढ़ी में सुधार लाना चाहते हैं तो लड़कियों को शिक्षा से वंचित न रखें। मैंने जो दो-चार बातें आपसे कही हैं, उम्मीद करता हूं कि आप उन्हें नजरंदाज नहीं करेंगी। उसे अमल में लाने में देर ना कीजिए। इसलिए, सुबह घर जाने से पहले नए तरीके से साड़ी पहन कर मुझे दिखाएं और फिर घर जाएं। तभी मैं समझूंगा कि जो कुछ मैंने कहा उसका आप लोगों ने पालन किया।“

उसके बाद वहां इकट्ठा महिलाओं में से विठाबाई नामक महिला ने महिलाओं की तरफ से उन्हें आश्वासन दिया कि सभी महिलाएं उनकी कही बातों पर अमल करेंगी।