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उसके बाद रा. शिवतरकर ने सभा के सामने आखिरी प्रस्ताव रखा। उस प्रस्ताव में सत्याग्रह समिति की ओर से मुंबई इलाके के मराठी भाषिक सभी जिलों से महाड़ सत्याग्रह के लिए जो प्रतिनिधि आए थे, उनके प्रति आभार प्रकट किया गया था। महाड़ परिषद के बारे में कई बातें कहने लायक अपूर्व हैं। उनमें से एक यह कि महाड़ के चवदार तालाब का मसला केवल, केवल कुलाबा जिले के लोगों से जुड़ा है ऐसा न मानते हुए वह सभी अस्पृश्य लोगों से जुड़ा है, ऐसा माना गया था। मराठी भाषक जिलों में ऐसा कोई जिला नहीं था, जहां से लोग महाड़ सत्याग्रह के लिए न आए हों। ऐसी एकता अगर अस्पृश्य लोग हर बार दिखाएंगे तो अस्पृश्यता निवारण का काम बहुत आसान हो जाएगा. इस प्रकार रा. शिवतरकर के भाषण के बाद तथा रा. संभाजी गायकवाड़ के समर्थन के बाद तालियों की गड़गड़ाहट के बीच प्रस्ताव पारित हुआ और रात डेढ बजे सत्याग्रह परिषद का कामकाज समाप्त हुआ।