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अपने हक प्रस्थापित करने के लिए हमले की नीति अपनाए बगैर
कोई चारा नहीं
दिनांक 23 मार्च 1929 को बेलगांव में दोपहर चार बजे बेलगांव जिला बहिष्कृत
वर्ग की सामाजिक परिषद आयोजित की गई थी। परिषद के नियोजित अध्यक्ष
अस्पृष्य वर्ग के मशहूर नेता श्री सीताराम नामदेव शिवतरकर, श्री कोंडदेव श्रीराम
खोलवडीकर के साथ 22 मार्च, 1929 को सवा दस की मेल से बेलगांव आए। इस
अवसर पर परिषद के स्वागताध्यक्ष श्री डी. आर. इंगले ने अस्पृश्य लोगों के साथ
उनका स्वागत किया। अध्यक्ष का सम्मान कर उनके गले में फूलों का हार पहनाकर
उनकी जयकार की गई। उसके बाद अच्छी तरह सजाई गई गाड़ी में बिठा कर
श्री खोलवडीकर के साथ शहर के कलभाट रोड, लष्कर, हजाम गली, कंग्राल गली,
दरबार गली और चवाट गली से कर्नाटक बहिष्कृत छात्र आश्रम, बेलगाव तक अध्यक्ष
शिवतरकर जी का जुलूस निकाला गया। इस अवसर पर बैंड हुनरगे के बैंडवाले ने
अपने बैंड वादन से लोगों का मन मोह लिया। जुलूस 11 बजे अस्पृश्यों के बोर्डिंग
हाऊस के पास पहुंचा। बाद में शाम छह बजे श्री डी. आर. कांबले के घर अध्यक्ष
आदि लोगों का चायपान का कार्यक्रम हुआ।
शनिवार दिनांक 23 मार्च, 1929 को परिषद के काम की बेलगांव के छात्र आश्रम
की अमराई में दोपहर चार बजे शुरुआत हुई।
शुरुआत में ही विषय नियामक कमेटी ने बैठ कर प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया
था। इस अवसर पर अस्पृश्य वर्ग के सुधार के लिए नियुक्त की गई स्टार्ट कमिटी के
सदस्य डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर, डॉ. सोलंकी, मेसर्स जानवेकर, देशपांडे, रावसाहब
चिकोडी, रावसाहब थोरात तथा रा. मराठे, रा. गजेंद्रगडकर, नाडगौडा आदि बेलगाव
के स्पृश्य नेता और रा. कोंडदेव खोलवडीकर, दŸापंत पवार, डॉ. रमाकांत कांबले,
रा. यशवंतराव पोल और रामप्पा कांबले, धर्माण्णा सांब्राणी आदि अस्पृश्यों के नेता
उपस्थित थे।
शुरुआत में इष्ट जन और अध्यक्ष के स्वागत के लिए गान हुआ। इस अवसर पर
स्वागताध्यक्ष का विचारोŸोजक, प्रतिपक्ष को मात देने वाला, खरी खरी सुनाने वाला
भाषण हुआ। लोगों के मन पर इसका गहरा असर हुआ। और उससे स्पृश्य लोगों
को भी पाठ मिल सकता था। ऐसा लगा कि उन पर भी इस भाषण का असर हुआ।
* ”बहिष्कृत भारत“, 29 मार्च, और 12 अप्रैल, 1929