146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अध्यक्ष का भाषण पूरा होते ही स्टार्ट कमेटी के सभी सदस्यों के साथ डॉ. अम्बेडकर, सोलंकी, अय्यर और अध्यक्ष को चाय पार्टी दी गई। और इसके पश्चात् निम्नलिखित प्रस्तावों को मंजूर किया गया। प्रस्ताव पारित होने के बाद अस्पृश्य समाज के उद्धारक और नेता डॉ. अम्बेडकर साहेब, अध्यक्ष के अनुरोध पर तथा वहां उपस्थित लोगों के आग्रह के अनुसार बोलने के लिए उठ कर खडे़ हुए। उस वक्त तालियों की घनघोर गड़गड़ाहट हुई। उसके बाद उनके भाषण की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा,
”अध्यक्ष महोदय और सज्जनों,
काफी समय हो रहा है। बरसात होने को है। और आपकी मातृभाषा से मेरी मातृभाषा अलग है। भाषा अलग होने के कारण मेरे विचार आप तक पहुंचेंगे या नहीं इस बारे में भी मुझे शक है। इसलिए मैं अपना भाषण थोडे़ में समेटने वाला हूं।
हम जगह-जगह सभा का आयोजन करते हैं। भाषण करते हैं प्रस्ताव पारित करते हैं। बडे़-बडे़ वक्ताओं को लाकर उनके भाषण भी आयोजित करते हैं। हालांकि, मेरा विचार है कि अस्पृश्यता खत्म करने का यह कोई ठीक-ठीक मार्ग नहीं है। हम पर अन्याय, अत्याचार और जुल्म होते हैं इस बारे में प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजे और अगर सरकार ने हमारी अस्पृश्यता नष्ट करने के लिए हमें सार्वजनिक कुएं, तालाब, चाय के होटल और मंदिर अगर कानूनन हमारे लिए खोले तब भी हमें ही उसे प्रत्यक्ष में हमें ही उसका अमल करना होगा। अगर हम यह नहीं कर पाए तो कानून भले कितने भी अच्छे क्यों ना हों, उनसे कुछ फायदा नहीं होने वाला।
हमें अपनी अस्पृश्यता खुद ही मिटानी होगी! उस हिसाब से हम जब बलवान और निडर होंगे तभी हमारी अस्पृश्यता नष्ट होगी। इसके लिए हमें बहुत कष्ट करने पडे़गे। अगर कभी ऐसी स्थितियां पैदा हों, तो हो सकता है कि हमें स्पृश्यों के साथ हाथापाई भी करनी पड़े। इसके लिए हमें अपने अंदर हिम्मत रखनी होगी। मैं नहीं कहता कि यह गलत है, लेकिन हमारा समाज परावलंबी है। अस्पृष्य समाज, अस्पृश्य समाज के साथ सहयोगपूर्ण रवैए के बिना नहीं चलेगा। कई लोग पूछते हैं कि ऐसे बलवान समाज से असहयोग कर हमारी कैसे निभेगी? उनसे मेरा यही कहना है कि वे एक बात पक्की गांठ बांध लें कि आत्मनिर्भरता के मार्ग के अलावा अन्य सभी मार्ग घातक हैं और किसी काम के नहीं हैं, इसीलिए उन घातक मार्ग का अवलंब नहीं किया जाना चाहिए।
अस्पृश्य समाज में पैदा हुआ व्यक्ति भले कितना भी काबिल क्यों न हो, कितना भी विद्वान क्यों न हो, सर्वगुणसंपन्न क्यों न हो, उसके गुणों की केवल इस वजह से कद्र नहीं होती कि वह अस्पृश्य है। इसीलिए, अपने हक प्रस्थापित करने के लिए हमले की नीति अपनानी होगी। इसे अपनाए बगैर कोई चारा नहीं। धक्कमपेल की वर्तमान स्थिति में ऐसी नीति अपनाए बगैर और कोई उपाय नहीं।