24. अपने हक प्रस्थापित करने के लिए हमले की नीति अपनाए बगैर कोई चारा नहीं - मार्च 1929 बेलगांव - Page 165

148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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बेलगाव जिला बहिष्कृत वर्ग की सामाजिक परिक परिषद पहले अधिवेशन में

पारित किए गए प्रस्ताव

(अ) अस्पृश्यता के पालन को कानूनन अपराध घोषित किया जाए।

(ब) सरकारी सूची से जाति संबंधी कालम हटा दिए जाएं।

(अ) किसी को भी जन्म के आधार पर श्रेष्ठ या निम्न न समझा जाए। वेद, शास्त्र,

पुराण और अन्य धर्मग्रंथों में जन्म के आधार पर उच्च-निम्न का प्रतिपादन

किया जाता है इसलिए इन धर्मग्रंथों के कथ्य का अधिकार न मानें।

(ब) वर्णाश्रम धर्म ने हिंदू समाज में ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य, शूद्र इस प्रकार भेद

किए हैं। इसीलिए यह परिषद वर्णाश्रम धर्म के घातक सिद्धांतों के प्रति

निषेध व्यक्त करती है। साथ ही यह भी कहती है कि अपनी जाति या

समाज का परिचय देने वाले शब्द अपने नामों के साथ न जोड़ें।

(स) राष्ट्र की प्रगति के लिए तथा समता की स्थापना के लिए अस्पृश्यता

की परंपरा को तुरंत खत्म कर दिया जाना चाहिए। इसीलिए समाज या

कानून के नज़रिए से कोई भी जाति ऊंची अथवा निम्न नहीं समझी जाए।

साथ ही सार्वजनिक स्थान पर आने-जाने का अधिकार सबको मिले और

उसका हर किसी को प्रयोग करना चाहिए। तीसरा प्रस्ताव

धार्मिक मामलों में सरकार के रवैये के कारण बहुजन समाज की अनगिनत लोगों को अपमान सहना पड़ रहा है। उनके सामाजिक अधिकारों का हनन हुआ है। उनकी सामाजिक उन्नति अवरुद्ध हुई है। इसीलिए, इससे आगे सरकार धार्मिक विषयों में अपनी तटस्थता की नीति छोड़ दे। और बहुजन समाज की सामाजिक आजादी की रक्षा करने की कोशिश करें। उसी तरह इस बारे में समाजसुधारकों की ओर से प्रचलित कानून में बदलाव करें। चौथा प्रस्ताव

(अ) अब के बाद सरकार सभी निवेदित जमीनें उन लोगों को दे जिनकी माली

हालत बेहद खराब होती है। और सबसे पहले ऐसी जमीनें अस्पृश्यों को

दें। परिषद की राय में सरकार उन लोगों को जमीन के साथ कुछ रकम