152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और अपने समाज के उदर निर्वाह पर बाधा पहुंचेगी। किन्तु मेरे विचार में इस मुद्दे को लेकर हमारे सुधार और प्रगति की राह में वरिष्ठ, उच्च कहा जाने वाला समाज हमारे नासमझ लोगों को भ्रमित कर, और उन्हें भड़काकर षड्यंत्र रच रहे हैं। उनसे मेरा सवाल है कि, वैश्या के शान-शौकत भरे जीवन-यापन की राह और किसी गृहस्थाश्रमी नारी के स्वाभिमानी धरोहर का निर्वाह कर दिन भर मेहनत-मजदूरी कर जीवन-यापन का मार्ग चुनती है। शान-शौकत में लिप्त वैश्या का जीवन और गृहस्थाश्रमी सदाचारी महिला का जीवन इन दोनों में बहुत अंतर है, समान कुछ भी नहीं। वैश्या के जीने का ढंग शान-शौकत भरा, किन्तु घिनौना होता है, इस बात पर क्या कभी किसी ने गंभीरता से सोच-विचार किया है? यदि स्पष्ट रूप से कहा जाए तो स्वाभिमान शून्य जीवन, इज्जत त्याग कर किया जाने वाला कार्य नामर्दता का सूचक, संकेत होता है। जीवन के लिए स्वाभिमानी चेतना प्रज्ज्वलित रखें। अपनी आर्थिक हानि होने पर भी हमें अपने बुनियादी कर्त्तव्यों के प्रति सचेत रहना चाहिए। सुख या लोकप्रियता सहजता से प्राप्त नहीं होती। छिन्नी-हथौड़े के घाव सहे बिना पत्थर से ईश्वर की मूर्ति बन नहीं पाती। ठीक यही बात इन्सान के संसार और व्यवहार पर लागू होती है।
हम अपने कर्त्तव्यों का योग्य निर्वाह करने में जुटे होने पर तथाकथित उच्च कहे जाने वाले लोग हम पर बिना वजह अन्याय-अत्याचार करते हैं, यह बात सच है। हमें मानसिक, शारीरिक पीड़ा से गुज़रना होगा। हमारा अत्यधिक शोषण किया जाएगा, हमें छला जाएगा, यह बात मैं अच्छी तरह जानता हूं। किन्तु हमें अपनी उन्नति के कार्य में आने वाली बाधाओं को सहना ही होगा। बहुत सारे लोग मुझसे कहते हैं कि इस खेती, जमींदारी पद्धति के कारणों से हमसे अपने कर्त्तव्यों का पालन करना मुश्किल हो जाता है। इन लोगों से मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि खोती के सम्बन्ध में योग्य व्यवस्था मैं जल्द ही करने जा रहा हूं। किन्तु किसी एक बाधा का निपटारा ना होने की वजह से हाथ-पर-हाथ धरे निठल्ला बैठे रहने से समस्या हल नहीं होगी। इसीलिए आलस त्याग कर, और निडर होकर कार्य करते रहना जरूरी है। सिर्फ खोती, जमींदारी पद्धति द्वारा होने वाला शोषण भर समाप्त होने से समस्या का समाधान होना असंभव है। तथाकथित उच्च वर्ग के लोग गांव भर के गुण्डे इकट्ठा कर आप लोगों का जीना मुश्किल कर देंगे, तुम्हें डराएंगे-धमकाएंगे, उसका समाधान कैसे होगा? गांव के सार्वजनिक कुओं से समता के अधिकार से पानी निकालकर उसका इस्तेमाल करना आपकी हिम्मत-हौसले पर निर्भर है। आप लोगों के न्याय अधिकारों को प्रस्थापित करते समय, उच्च वर्ग के लोगों के डराने-धमकाने पर यदि आप डर कर अपने कर्त्तव्य पालन से पीछे हट गए तो समझो, तुम्हारे हाथों से कुछ भी होना संभव नहीं। आपकी प्रगति, सुधार के लिए यदि मैंने इस कोंकल अंचल में