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मुंबई शहर के शिक्षामंत्री ना. मौलवी रफीउद्दीन अहमद के निमंत्रण से महाबलेश्वर
में 6 मई, 1929 को प्राथमिक शिक्षा के प्रसार के साथ जुडे़ विभिन्न जिलों के और
अलग अलग जाति-धर्मों के लोगों की एक छोटी-सी परिषद बुलाई गई थी। इस
इलाके में प्राथमिक शिक्षा की गति में तेजी कैसे लाई जाए और आज की प्राथमिक
शिक्षा से संबंधित कानून में किस प्रकार के सुधार लाने की आवश्यकता है, आदि
बातों पर सोच विचार के लिए यह परिषद बुलाई गई थी। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर
भी इस परिषद के लिए उपस्थित थे। उन्होंने अपने विचार शिक्षामंत्री और परिषद
के सदस्यों के सामने रखे। उन्होंने अपने भाषण में कहा,
”प्राथमिक शिक्षा का प्रसार राष्ट्र की प्रगति की दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण प्रश्न
पूछा है। आज के समय में जिस देश का बहुजन समाज अनपढ़ है, ऐसे देश की
जीवन के कलहों में निभेगी नहीं, इसे अलग से बताने की जरूरत नहीं है। प्राथमिक
शिक्षा का देश में सभी जगह प्रसार राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति की नींव है। लोगों की
खुशी पर अगर यह मामला छोड़ दिया जाए तो प्राथमिक शिक्षा का सुदूर प्रसार होने
के लिए कई शतकों का समय लगेगा। इसीलिए प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य करने वाला
कानून बनाना पड़ता है। हम देखते हैं कि आज जो उन्नत राष्ट्र हैं, उन सभी देशों
ने अनिवार्य शिक्षा का कानून बना कर ही लोगों की निरक्षरता को खत्म किया है।
जो वर्ग पहले ही शिक्षा का लाभ लेते हैं, उन पर शिक्षा की अनिवार्यता लागू नहीं
करनी पड़ती। जिन्हें शिक्षा का महत्व समझ में नहीं आता और जो उस बारे में
उदासीन होते हैं, उनके लिए ही अनिवार्य शिक्षा का कानून लागू करना पड़ता है।
इसीलिए इस देश में शिक्षा के क्षेत्र में जो पिछडे़ वर्ग हैं, उनसे जुड़ा यह सवाल है।
प्राथमिक शिक्षा के बारे में कानूनन अनिवार्यता लागू करने के उद्देश्य से स्मृतिशेष
ना. गोपाल कृष्ण गोखले जो बिल ले आए, तब से अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के
आंदोलन की शुरुआत हुई। देश की जनता ने और खास कर पिछडे़ वर्गों के नेताओं
ने इस बिल का जोरदार समर्थन किया। हालांकि विभिन्न प्रांतों में अनिवार्य शिक्षा का
कानून लागू होने के लिए कई साल लगे। मुंबई इलाके में प्राथमिक शिक्षा की
अनिवार्यता का कानून बना है लेकिन उस पर पूरी तरह से अमल नहीं हो पाया है।
उसे म्युनिसिपालिटी और लोकल बोर्ड पर आधारित रखा गया है। सरकार ने खास
अनुपात में मदद देना तय किया है इसके बावजूद अनिवार्य शिक्षा लागू करने के
लिए जो अतिरिक्त खर्च वहन करना पडे़गा उसके लिए कई म्युनिसीपालिटी और
* बहिष्कृत भारत : 31 मई, 1929