28. इंसानियत के अधिकार के लिए अत्याचार के खिलाफ विद्रोह करें - मई 1929 चित्तेगाव (नासिक) - Page 180

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खिलाफ विद्रोह करें

रविवार, दिनांक 26 मई, 1929 के दिन नासिक जिले की ओर से चिŸोगाव में स्वाभिमान संरक्षक परिषद का अधिवेशन आयोजित किया गया था। अध्यक्ष पद के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर, बार एट लॉ, एम. एल. सी. को चुना गया था। इस परिषद में करीब छह हजार दर्शक और प्रतिनिधि उपस्थित थे। परिषद के लिए नासिक से प्रो सबनीस, मेसर्स गायकवाड़, सेठ रणखांबे, काले आदि लोग और देवलाली से स्वयंसेवक पथक, मुंबई से समता पत्र के संपादक श्री देवराव नाईक, समाज समता संघ के मेसर्स द. वि. प्रधान, रा. कवली बी. ए, भा. वि. प्रधान बी. ए., एल. एल. बी, भो. बा. देशमुख एम. ए., शं. शा. गुप्ते बी. एस. सी., भा. र. कद्रेकर आदि लोग आए हुए थे। स्वागताध्यक्ष श्री रोकडे सेठ बीमार होने के कारण उनका भाषण नहीं हो पाया।

अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा-

”स्वाभिमान सुरक्षा का आंदोलन जोरदार ढंग से शुरू करना आज की स्थितियों में जरूरी हो गया है। इसी आंदोलन के बल पर स्पृश्य और अस्पृश्य के बीच के आपसी भिन्नता, भेदभाव के प्रति लोगों में अनुभूति होगी। पूरे समाज में समता स्थापित करने के लिए अवसर प्राप्त होगा। अस्पृश्योद्धार आदि अस्पृश्यों के उद्धार के बारे में हवाई बातचीत करने के दिन अब लद चुके हैं। आज प्रत्यक्ष स्वाभिमान को जगाने का समय आन खड़ा है। अस्पृष्य समाज की हालत को देखें तो उनकी स्थिति के बारे में असंतोष, असमाधान दिखाई देगा। अस्पृश्य माने गए समाज में जन्म से शामिल होने के कारण उच्चवर्ण के समाजबंधुओं से अधिक अलौकिक गुण होने के बावजूद वे कुछ कर नहीं पाते। उच्च वर्णियों द्वारा पैदा किए गए हालात हमारे, हमारे स्वाभिमानपूर्ण उद्देश्यों और कार्यों के राह के रोडे़ बन रहे हैं। मंदिर प्रवेश, तालाब, कुएं आदि जगहों पर प्रवेश करने के लिए अस्पृश्यों को मना किया जाता है। उन पर अत्याचार किए जाते हैं। ऐसे हीन हालात से मुक्त होने के लिए अस्पृष्य बंधुओं को चाहिए कि वे अपना स्वाभिमान जगाएं और इंसानियत की रक्षा के लिए आर या पार की लडा़ई छेड़ दें। केवल शिक्षा से अगर इंसानियत पाई जाती तो पढे़-लिखे वर्ग की ओर से हम अस्पृष्य बंधुओं पर सुधार के इस अवसर पर अन्याय

* ”बहिष्कृत भारत“, 21 जून, 1929