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पूर्वघोषित कार्यक्रम के अनुसार पातुर्डा, जिला बुलढाणा में बुधवार, दिनांक 29
मई, 1929 को डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर, बार. एट. लॉ की अध्यक्षता में मध्यप्रांत
और वर्हाड अस्पृश्य परिषद का सम्मेलन निर्विघ्न संपन्न हुआ। इस सम्मेलन के लिए
अस्पृष्य वर्ग के नेता रा. पी. के. मटकर, रा. सोनोने, रा. मकेसर, रा. केशवराव खंडारे
रा. (राजमान्य) संभाजी जाधव, रा. रायभान इंगले, रा. संभूजी खंडारे आदि लोग
उपस्थित थे। इसी तरह ब्राह्मणेतर पार्टी के नेता वेद शास्त्र संपन्न आनंदस्वामी, श्री
उकंडराव टाले आदि लोग भी उपस्थित थे। डेढ़ हजार से अधिक लोग वहां इकठट्ठा
हुए थे। शाम सात बजे सम्मेलन की शुरुआत हुई। इसी सम्मेलन की शुरुआत में
उदाहरणस्वरूप रा. बक्षुरामजी दाभाड़े की कन्या कु कवतिकाबाई का ब्याह सखाराम
इंगले के साथ संपन्न हुआ जो कि अस्पृश्य वर्ग के लिए उदाहरणस्वरूप था क्योंकि,
यह विवाह परिष्कृत तरीके से और कम खर्चे में किया गया था।
इसके बाद परिषद के कामकाज की शुरुआत हुई। स्वागताध्यक्ष के भाषण के
बाद डॉ. अम्बेडकर का विद्वŸापूर्ण और तर्कसंगत भाषण हुआ उन्होंने कहा,
”इस जिले के अस्पृश्य वर्ग के तथा ब्राह्मणेतर वर्ग के नेताओं ने मिल कर
विशेष रूप से अस्पृश्यता निवारण की जी-तोड़ कोशिश की। लेकिन उन्हें इस
काम में सफलता नहीं मिली। उल्टे पुरोहित भिक्षुतंत्र से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से
उन पर कई तरह के अत्याचार किए गए और उनके आंदोलन को कुचल देने की
कोशिश की गई। नेताओं के बारे में अखबारों में झूठमूठ खबरें फैलाना, अस्पृश्य वर्ग
में फूट डालना आदि निंदनीय तरीकों को उन्होंने अपनाकर मानों उस आंदोलन को
नेस्तनाबूत करने की उन्होंने कसम खाई हो। उनके इन आत्यंतिक अत्याचारों, अन्याय
और छल-कपट से तंग आकर इस जिले के कुछ हिस्सों के हजारों अस्पृश्य धर्म
परिवर्तन करने का मन बना चुके हैं। उन्होंने इस प्रकार का एक नोटिस भी स्पृश्य
वर्ग के नाम भेज दिया है। लेकिन स्वार्थी अंतःकरण वाले भिक्षुतंत्र को इससे कोई
फर्क नहीं पड़ा। इस बात का पता ही न होने का नाटक करने वाले शुद्धिवालों और
हिंदुसभा वालों ने तो उनके दुखों की रत्ती भर भी परवाह नहीं की।“
* ”बहिष्कृत भारत“, 21 जून, 1929