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सभी अस्पृश्यों को हम समान मानते हैं
शनिवार, दिनांक 29 जून, 1929 के दिन रात 7 बजे मुंबई के परेल इलाके के दामोदर हॉल में रावबहादुर बोले, जे. पी. की अध्यक्षता में बहिष्कृत वर्ग की विशाल सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था। सभा में बहिष्कृत वर्ग का बड़ा समुदाय इकट्ठा हुआ था। मंच पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, मे. डॉ. सोलंकी, में. शिवतरकर, म.े द. वि. प्रधान, भा. र. कद्रेकर, रा. गुप्ते, ति. गायकवाड़, ति. आडरेकर, ति. जाधव आदि लोग दिखाई दे रहे थे। तिर्शरूप गायकवाड़ ने अध्यक्ष की सूचना को सभा पटल पर रखी और उसका समर्थन किया रा. वालावलकर ने। नियोजित अध्यक्ष रावबहादुर बोले, ज.े पी. (जस्टिस ऑफ पीस) तालियों की गड़गड़ाहट में अध्यक्ष स्थान पर विराजमान हुए। अध्यक्ष का शुरुआती भाषण हुआ और सभा में निम्नानुसार प्रस्ताव पारित किए गए -
पहला प्रस्ताव - कोकण इलाके का, खास कर चिपलूण, खेड और दापोली तालुका का बहिष्कृत वर्ग अपनी उन्नति के मार्ग पर अग्रसर है लेकिन उन पर छुआछूत मानने वाले हिंदू लोगों द्वारा अन्याय किया जा रहा है। उनके इस अधम कृत्य के लिए यह सभा उनके प्रति निषेध व्यक्त करती है। साथ ही अपना गुस्सा भी व्यक्त करती है। इस शिकायत के बारे में न्याय पाने के लिए अस्पृश्य नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल नेक नामदार गवर्नर साहब के यहां भेजने की इजाज़त यह मंच दे रहा है।
दूसरा प्रस्ताव - सभा की ओर से सूचित किया जाता है कि, कोकण के बहिष्कृत वर्ग के हितों की रक्षा के लिए एक ”कोकण संरक्षक फंड“ निर्माण किया जाए।
तीसरा प्रस्ताव - बहिष्कृत वर्ग के श्री चां. भ. खेरमोडे और रा. गाडेकर ये दो छात्र इस वर्ष की बी. ए. परीक्षा में और रा. कदम मैट्रिक की परीक्षा में पास हो चुके हैं, और इसलिए यह सभा उनका अभिनंदन करती है।
चौथा प्रस्ताव - डॉ. पी. जी. सोलंकी, एम. एल. सी. को सरकार ने मुम्बई म्युनिसिपालटी के सदस्य के रूप में चयन किया है, इसलिए यह सभा डॉक्टर साहब का अभिनंदन करती है और सही तैनाती के लिए संतोष व्यक्त करती है।
आखिर लोगों के आग्रह के कारण और अध्यक्ष की इच्छा की खातिर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठ कर खडे़ हो गए। उन्होंने कहा कि-
* बहिष्कृत भारत : 12 जुलाई, 1929