2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की सामाजिक रचना दो मूलभूत तत्त्वों के अनुसार हुई दिखाई देती है, एक जन्म पर आधारित योग्यता और दूसरी जन्म सिद्ध पवित्रता। इन दो सिद्धांतों के आधार पर हिंदुओं का तीन वर्गों में विभाजन किया जाए तो उनके तीन वर्ग बनते हैं - 1. जन्म से श्रेष्ठ और पवित्र जिसे हम ब्राह्मण वर्ग कहते हैं वह; 2. जिसकी जन्म पर आधारित श्रेष्ठता और पवित्रता ब्राह्मणों से थोड़ी कम है ऐसा गैर ब्राह्मण वर्ग; 3. जो जन्म से छोटे और अपवित्र हैं, ऐसे हम बहिष्कृतों का वर्ग। इस तरह का वर्गीकरण करके धर्म द्वारा तय किए गए श्रेष्ठता और पवित्रता के विषम प्रमाणों का इन तीन वर्गों पर असर हुआ है।
जन्म आधारित श्रेष्ठता और पवित्रता के कारण गुणहीन ब्राह्मणों का भी कल्याण हुआ है। गैर ब्राह्मणों पर जन्म आधारित अयोग्यता की गाज गिरी हुई है। उनके पास विद्या नहीं है इसलिए आज वे पिछड़ गए हैं फिर भी विद्या और धन हासिल करने के रास्ते उनके लिए खुले हैं। ये दोनों ही चीजें आज भले ही उनके पास न हों मगर कल उन्हें मिलने वाली हैं। हमारे बहिष्कृत वर्ग की स्थिति जन्म आधारित अयोग्यता और अपवित्रता के कारण बहुत चिंताजनक हो गई है। लंबे समय से अयोग्य और अपवित्र माने जाने के कारण प्रगति के दो बुनियादी कारण नैतिक आत्मबल और स्वाभिमान बिल्कुल लुप्त हो गए हैं। हिंदू धर्मावलंबियों की तरह उन्हें सामाजिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। वे स्कूलों में जा नहीं पाते, वे सार्वजनिक कुओं से पानी नहीं भर सकते, रास्ते पर चल नहीं सकते, वाहनों का उपयोग नहीं कर सकते आदि. छोटे-मोटे अधिकार भी उन्हें हासिल नहीं हैं। जन्म पर आधारित अयोग्यता और अपवित्रता के कारण उनका आर्थिक नुकसान भी हुआ है। व्यापार, नौकरी और खेती ये धन अर्जन के तीन मार्ग उनके लिए खुले नहीं हैं। अस्पृश्यता के कारण ग्राहक न मिलने से उन्हें व्यापार करने की सुविधा हासिल नहीं है। छुआछूत के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिलती। कभी कभी योग्य होने के बावजूद बाकी लोग उनके मातहत काम करने के लिए इसलिए राजी नहीं होते कि वे निचली जाति के हैं। इसलिए उन्हें नौकरी मिलना मुश्किल होता है। इसी भावना की वजह से उनको सेना से बेदखल कर दिया गया है। मरे हुए मवेषी के जमीन के टुकड़े के अलावा खेती किसके पास है? कृषि के क्षेत्र में भी उनकी यही हालत है। इस तरह से सताए हुए समाज की उन्नति हो नहीं सकती। प्रतिभा और अनुकूल परिस्थिति दोनों ही उन्नति के लिए जरूरी हैं। बहिष्कृत समाज में प्रतिभा की कमी नहीं है, यह सभी मानते हैं। लेकिन इसका विकास नहीं हो पाता तो इसकी वजह यह है कि परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। परिस्थितियों को अनुकूल बनाने के लिए कई उपाय सुझाए जाते हैं लेकिन इसके लिए हमें राजनीतिक शक्ति हासिल करनी चाहिए और जाति पर आधारित प्रतिनिधित्व हासिल किए बिना हमारे हाथों में राजनीतिक शक्ति नहीं आएगी। सत्यमेव जयते का सिद्धांत खोखला