33. अखंड भारत हमारा ध्येय है - अगस्त 1930 नागपुर - Page 195

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अखंड भारत हमारा ध्येय है

साइमन कमीशन के प्रस्तावों के बारे में अस्पृश्य समाज की प्रतिक्रिया जान लेने और उनके राजनीतिक हकों के लिए भविष्य की नीति तय करने की जरूरत थी। इसके अलावा विलायत में होने वाले गोलमेज सम्मेलन में अस्पृश्य वर्ग के प्रतिनिधि का जाना भी उतना ही महत्वपूर्ण था। क्योंकि हिंदुस्तान के भावी संविधान की योजना उस सम्मेलन में बनाई जाने वाली थी। और देश का भविष्य तय करते समय इस देश के सात करोड़ जनसंख्या वाले अस्पृश्य वर्ग का राजनीतिक भविष्य उसी समाज के प्रतिनिधियों को तय करने का अधिकार मिलना जरूरी था। उसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर अधिवेशन का आयोजन जरूरी हो गया था। इस तरह का अधिवेशन लेने का, आयोजित करने का सम्मान पहली बार नागपुर को मिला।

नागपुर के स्थानीय नेताओं ने ही निर्णय लिया कि अखिल भारतीय अधिवेशन नागपुर में आयोजित किया जाए। इस निर्णय के अनुसार दशरथ पाटील और लक्ष्मणराव ओगले एमएलसी मुंबई जाकर डॉ. अम्बेडकर से मिले। इस मुलाकात में अखिल भारतीय दलित वर्ग की परिषद डॉ अम्बेडकर की अध्यक्षता में नागपुर में लेना तय हुआ। नागपुर में 8 और 9 अगस्त, 1930 को होने वाला अखिल भारतीय डिप्रेस्ड क्लासेस कांॅंग्रेस का यह अधिवेशन अस्पृश्य वर्ग के उत्थान के आंदोलन का इतने व्यापक स्तर पर आयोजित किया गया पहला ही प्रातिनिधिक आयोजन था।

स्वागत समिति के पदाधिकारी

स्वागताध्यक्ष टी. सी. साखरे, नागपुर, उपाध्यक्ष दशरथ लक्ष्मण पाटील, बेला,

खजिनदार विश्रामजी सवाईथूल, नागपूर, सेक्रेटरीज एल. के. ओगले, एम.एल.सी, अमरावती, हरदास एल. एन., कामठी, पी. के. भटकर, अमरावती, शामराव जी. रहाटे, वडगाव, एच. डी. बेहाडे (मातंग नेता) नागपूर। ख्1,

अखिल भारतीय दलित काँग्रेस परिषद के लिए किस-किस को आमंत्रित किया जाए, बुलाया जाए और परिषद किस की अध्यक्षता में हो, इसके लिए परिषद के सचिव हरदास एल. एन. ने पुणे के शिवराम जानबा कांबले को खत लिखा था। खत और शिवराम जानबा कांबले द्वारा उस खत का दिया गया जवाब आगे दे रहे हैं -

शिवराम जानबा कांबले द्वारा इस खत का दिया गया जवाब -

  1. ”विदर्भ (वर्हाड) के दलित आन्दोलन का इतिहास“ - लेखक : हि.ल. कोसारे, पृष्ठ 147-148