186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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समाज का कोटि-कोटि धन्यवाद
जिन नेताओं ने, सामाजिक कार्यकŸार्ओं ने और सेवकों ने दलित काँग्रेस की बागडोर सम्हाली और बहिष्कृत वर्ग की राजनीतिक क्रांति की पहले-पहल शुरुआत की और सामाजिक जीवन में आमूलाग्र बदलाव लाने के लिए आगे बढ़ाए गए संगठित कदमों के दृढ़ संकल्पों के कार्य के, इस समाज पर अनंत उपकार हैं। 1930 में डॉ. अम्बेडकर के प्रभावी नेतृत्व में आत्मोद्धार के इस आंदोलन का भारतीय सरकार पर पहला संगठित कदम दलित काँग्रेस ने पहली बार इस अधिवेशन के जरिए उठाया। अधिवेशन में पारित प्रस्ताव
8 और 9 अगस्त, 1930 में नागपुर में हुई अखिल भारतीय डिप्रेस्ड क्लासेस की कॉंग्रेस में जो प्रस्ताव रखे गए थे वे इस प्रकार हैं -
- अखिल भारतीय डिप्रेस्ड क्लासेस कांफ्रेंस की ओर से साफ तौर पर इस बात की
घोषणा की जाती है कि भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस द्वारा संपूर्ण आजादी के जिस
विचार की घोषणा की गई है, वह भारत के हित संबंधों के लिए घातक और
नुकसानदेह साबित होने वाली है। इसीलिए राष्ट्रीय काँग्रेस की संपूर्ण आजादी
की मांग का हम बिल्कुल समर्थन नहीं करते। इस काँग्रेस के अनुसार उपनिवेश
का स्वराज ही भारत की स्थितियों के अनुकूल सर्वोŸाम उद्देश्य हो सकता है।
- उपनिवेशिक स्वराज तुरंत प्राप्त हो, इस उद्देश्य से सŸा का हस्तांतरण करते हुए
जिम्मेदारी से भरे जिन अधिकारों का तुरंत सŸांतर करना राज्य के कामकाज
के दृष्टिकोण से अव्यावहारिक होता है उन मामलों को छोड़ कर अन्य सभी
जिम्मेदारीपूर्ण अधिकारों संबंधी अधिसŸा प्रदान करने के लिए इस काँग्रेस का
विरोध नहीं है। लेकिन ऐसा करते हुए अस्पृश्य वर्गों के हितसंबंधों की सुरक्षा
के लिए हिंदुस्तान के संविधान में जिन बातों को समाविष्ट किया जाना चाहिए
वे इस प्रकार हैं -
(अ) देश के सभी केंद्रीय और प्रांतिक विधिमंडलों में अस्पृश्यों को योग्य
प्रतिनिधित्व दिया जाए।
(ब) सरकारी नौकरियों में सही अनुपात में आरक्षित जगहें हों।
- स्थानीय स्वराज संस्थाओं में अस्पृश्य वर्ग की शिक्षा के बारे में, उनके अधिकार
और हितसंबंधों की यदि उपेक्षा हो रही हो तो उस संदर्भ में भारत मंत्री से
(सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) से फरियाद करने का अधिकार हो और शिक्षा के इस