194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नहीं हो सकते हैं, ऐसा मुझे नहीं लगता। असल में कोई इससे भी आगे जाकर कह सकता है कि उनके और आम जनता के बीच जो गहरी खाई है उसके कारण उन्हें आम जनता की जरूरतें, आशा-आकांक्षाओं का ज्ञान होना संभव ही नहीं है। यही नहीं, यह वर्ग आम जनता की आशा-आकांक्षाओं का दुश्मन है। मैं इतना जोर देकर कह रहा हूं इसकी वजह यही है कि इस स्वदेशी सामंती वर्ग के हाथ में शासन की सŸा सौंपी नहीं जा सकती। हजारों सालों से चली आ रही और आज भी जो लागू है उस जनतंत्र संबंधी आम जनता की धारणाओं से स्वराज की यह कोरी कल्पना कहीं मेल नहीं खाती है। हर व्यक्ति का मूल्य मानना यही आधुनिक जनतांत्रिक राज्य का मूलभूत तत्व है और हर व्यक्ति को केवल एक बार यह जीवन जीने का मौका मिलता है, इसलिए हर व्यक्ति को अपने गुणों का विकास करने का पूरा-पूरा मौका मिलना चाहिए। लेकिन, यह कहा नहीं जा सकता कि भारत के सामंतों को इनमें से कोई सिद्धांत मान्य हों। वे यही मानते हैं कि यह जीवन कई जीवनों की शृंखलाओं का एक हिस्सा भर है और वर्तमान जीवन की स्थिति उनके पूर्वजन्म के कर्मों का फल है। पूर्वजन्म में किए पाप-पुण्यों के हिसाब से ही व्यक्ति के वर्तमान जीवन का फल निश्चित होता है। किसी का चरित्र भले कितना भी उज्ज्वल क्यों न हो, भले उसने कितनी भी योग्यता हासिल क्यों न की हो, जन्म से प्राप्त उसकी सामाजिक स्थिति में कोई फेरबदल नहीं हो सकता। सामंतवाद का सिद्धांत है कि, जब कोई ब्राह्मण होकर जन्म पाता है तो वह जीवनपर्यंत ब्राह्मण के अलावा कुछ और नहीं हो सकता। और भले कुछ भी हो, परिया आखिर परिया ही रहता है। यह कोई गप्प नहीं, फिलहाल जो धर्ममत अस्तित्व में है वह यही है। ऐसी विचारधारा रखने वाले लोगों के हाथ में अनिर्बाध सŸा सौंपना फांसी देने वाले के हाथ में छुरी भी थमाने जैसा है।
- इस तरह की राय देने-अपनाने के कारण बेहद निर्दयता के साथ घोषित किया जाता है कि हम जातीयवादी और इस देश के दुश्मन हैं। हर देश में राज्य के शासन के सभी सूत्र पढे़-लिखे वर्ग के सुपुर्द होते हैं और काँग्रेस वाले यह कहते नहीं थकते कि समर्थ शासन के लिए यह जरूरी भी है। भविष्य में कोई भी हमारे मालिक बनें लेकिन सामंतों के हाथों में सŸा सौंपते हुए सबकी सोच यही है कि सामाजिक और राजनीतिक मसले दो अलग बातें हैं और उनका आपस में कोई संबंध नहीं है। सद्गृहस्थों, मानवी जीवन के लिए इस प्रकार की यांत्रिक कल्पनाओं के द्वारा मार्गच्युत करने वालों से आपको सावधान रहना होगा। इस तरह की चोर कोशिशों से आप अगर सावधान हों तो आप पाएंगे कि व्यक्ति को उसके स्वभाव से प्राप्त गुणों से केवल राजनीति के लिए अलग नहीं किया जा सकता। जब कोई व्यक्ति राजनीतिज्ञ के नाते आपका वोट मांगने आता है तब वह अपनी राय, हितसंबंध और अपना स्वभाव कोट की तरह खूंटी पर टांग कर बिल्कुल कोरा बन कर नहीं