33. अखंड भारत हमारा ध्येय है - अगस्त 1930 नागपुर - Page 214

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कोशिश करना स्वाभाविक भी है। क्योंकि भारत की स्थिति इन राष्ट्रों की स्थिति से मिलती-जुलती है। इन राष्ट्रों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की व्यवस्था संविधान के कानून के द्वारा की गई है और इसे अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकार कहा गया है। नेहरू कमेटी ने भी दलित वर्ग की सुरक्षा व्यवस्था के तौर पर इस योजना को अपनी रिपोर्ट में मान्यता प्रदान की है। लेकिन इस प्रकार की योजना से आप ठगे जाओगे इस बारे में मैं आपको आगाह करना चाहता हूं। भारत के राजनीतिज्ञों का, मौलिक अधिकारों के नाम से जानी जाने वाली संविधान की धारा में बेहद विश्वास है और अंग्रेजों के आक्रमण के विरोध में वे जिस प्रकार अपने लिए इन मौलिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं, उसी तरह अपने वर्ग के लोगों द्वारा होने वाले अत्याचारों के खिलाफ अल्पसंख्यकों को भी उसी प्रकार के अधिकार देने के लिए उत्सुक हैं। लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए इस प्रकार के इंतजामों वाली योजनाओं का हमें धिक्कार करना चाहिए। इस प्रकार की योजनाएं भले स्वागतायोग्य लगें लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि मौलिक अधिकारों के संदर्भ में दिया गया कोई विश्वास, फिर भले वह कितना भी व्यापक क्यों न हो, उसका आशय और अनुसंधान के नजरिए से उसकी व्याख्या कितनी भी स्पष्ट क्यों न हो, वह उन हकों के उपभोग की गारंटी नहीं दिला सकते। अधिकारों की केवल उद्घोषणा करने भर से कुछ नहीं होता है। मौलिक अधिकार यदि छीन लिए जाते हैं या उनका हनन होता है, तो उसके विरुद्ध में, या वे ना छीने जाएं, इसका ठोस उपाय किए जाने की व्यवस्था, प्रावधानों के बगैर मौलिक अधिकार सुरक्षित है, या रह पाएंगे, यह कहा नहीं जा सकता। 1914 के महायुद्ध के बाद पैदा हुए और जिनका मैंने पहले जिक्र किया है उन राष्ट्रों के संविधान में ऐसी योजना की गई है कि अल्पसंख्यकों को अगर लगे कि अपने मौलिक अधिकारों पर अतिक्रमण हुआ है या उन अधिकारों का सŸाधारी बहुसंख्यकों की ओर से हनन हुआ है तो वे राष्ट्रसंघ से शिकायत कर सकते हैं। राष्ट्रसंघ में इस कार्य के लिए एक कमेटी नियुक्त की गई है, जो इस तरह की अपीलों का सोच-विचार के बाद निर्णय करती है। मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर उसके खिलाफ किसी तरह के उपायों का प्रावधान क्या नेहरू कमेटी की रिपोर्ट में है? मुझे तो ऐसा कोई उपाय किया हुआ उस रिपोर्ट में दिखाई नहीं दिया। इसीलिए, नेहरू कमेटी की सुरक्षा संबंधी उपायों की गारंटी महज एक धोखा है।

  1. नेहरू योजना में अगर इस प्रकार राष्ट्रसंघ में अपील करने का प्रबंध होता, तब भी मैं आपको यही सलाह देता कि आप इस योजना को स्वीकार ना करें। गवर्नर, वायसराय अथवा राष्ट्रसंघ के पास अपील करने का हक होना यानी दलित वर्ग के शस्त्रागार में एक हथियार का इजाफा होना है और उम्मीद करने लायक यह मामला है। लेकिन यह हथियार भी असरदार साबित नहीं हो सकता। आपके हितसंबंधों