33. अखंड भारत हमारा ध्येय है - अगस्त 1930 नागपुर - Page 216

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फिर कोई यह पूछ सकता है कि अल्पसंख्यक जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में ही प्रतिनिधित्व की जगहें दी जाएं तो उनकी सुरक्षा का इंतजाम पूरा हुआ, ऐसा कैसे माना जा सकता है? अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की भाषा का इस्तेमाल कर उनका प्रतिनिधित्व सिर्फ उनकी जनसंख्या के अनुपात में ही रखना ये दो बातें परस्पर विरोधी हैं। अल्पसंख्यकों को उस अनुपात में विधिमंडल में प्रतिनिधित्व देना तय करवाने का मतलब है, आज समाज में जो हाल है उसी की एक छोटी प्रतिकृति संसद में बना लेनी होगी। इस तरह की योजना से समाज का बलाबल ठीक रखता है, संतुलन बना रहता है। समाज की मौजूदा हालत को वह बरकरार रखती है। इसीलिए अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के नजरिए से सही ढंग से सुधार लाने हों तो सामाजिक शक्तियों के संतुलन में अल्पसंख्यकों के लिए सुविधाजनक हो इस ढंग से सामाजिक बदलाव किया जाए और यह जनसंख्या के अनुपात से अतिरिक्त तराजू की तरह पलड़ा बहुसंख्या की ओर न झुक जाए, इसके लिए पासंग की जगहें अल्पसंख्यकों को देकर ही उसे साध्य किया जा सकता है।

  1. सभी अल्पसंख्यकों को जनसंख्या के अनुपात से अतिरिक्त पासंग, पलड़ा, स्थिर रहने की जगहें देना आवश्यक है, यह बात मान भले ही ली गई हो लेकिन इस पर प्रत्यक्ष कार्यवाही करने के बारे में एकमत हुआ है ऐसा नहीं लगता। इस नाप-तौल पासंग की शक्ति से क्या पाया जा सकता है, इसके बारे में ठीक-ठीक जानकारी ना होने की वजह से ही ऐसा हो रहा है, ऐसा मुझे लगता है। वरना इन अतिरिक्त जगहों के अलावा अल्पसंख्यकों की शक्ति उनकी सुरक्षा के लिए बेहद कम साबित होगी। इसीलिए, शक्ति की जो आपूर्ति करनी है, वह हालिया अनुपात में कितनी कम है इसके नाप-तौल के आधार से बढ़ाई जानी चाहिए। जिनके हाथ में कम शक्ति हो उन्हें उसकी अधिक आपूर्ति की जानी चाहिए। किसी के हाथ में जरूरत से अधिक शक्ति हो तो उसे निकाल लेनी होगी। यही बात अलग शब्दों में बयान करनी हो तो सभी अल्पसंख्यक समुदायों को पासंग या स्थिर पलड़े की ये जगहें नहीं मिलेंगी उनके सामाजिक दरजे के अनुसार उन्हें मिलने वाली जगहों की संख्या बदलती रहेगी। किसी अल्पसंख्यक समुदाय का सामाजिक दर्जा भले निम्न हो, ऐसा भी संभव है कि उसे ज्यादा जगहें मिलें और जिन लोगों का दर्जा, प्रतिष्ठा प्राप्त हो, उन्हें कम जगहें मिलें। दुर्भाग्य से कुछ अल्पसंख्यकों की मानसिकता ऐसी है कि वे अपने सामाजिक दर्जे के बल पर खुद को हमेशा अन्यों की तुलना में उच्च जगहों पर बैठाना चाहते हैं और प्रतिनिधित्व की अधिक से अधिक जगहें हड़पना चाहते हैं। और वह भी इसलिए कि उनका सामाजिक दर्जा, हैसियत ऊंचा है। मैंने पहले ही बताया है, कि पासंग की अतिरिक्त जगहें देने के पीछे उद्देश्य यही है कि तूफानी हवाओं में थरथर कांपने वाले मेमने को ठंड से सुरक्षा प्रदान की जाए और