202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
निर्णय को लागू करने का अधिकार किसी एक ही विशिष्ट जाति के हाथ में होता
है वहां इस तरह के प्रसंगोचित न्याय देने के अधिकार का दुरुपयोग विशिष्ट वर्ग
की अनुचित और बेहिसाब तरक्की हासिल करने के लिए किए जाने की बहुत बड़ी
संभावना होती है। इस पर सही उपाय है कि इस आग्रह पर कायम रहें कि सरकारी
नौकरियों में दलित वर्ग के साथ सबको सम्मिलित किया जाए। दलित वर्ग के लिए
सरकारी नौकरियों में खास अनुपात में पद आरक्षित रखने की मांग हमें करनी होगी
और संविधान की एक धारा में बदलाव कर यह साध्य कर पाना असंभव नहीं है। इस
प्रकार के सुरक्षा प्रबंधों के द्वारा ही आप भविष्य में देश के मंत्रीमंडल में कुछ जगहों
की मांग कर सकते हैं। लेकिन दलित वर्ग चूंकि हमेशा अल्पसंख्यक रहने वाला है,
इसलिए कम से कम आज तो इसकी संभावना बहुत कम नजर आती है। इस प्रकार
की शाश्वत मांग करना क्यों जरूरी है यह भी इससे व्यक्त होता है।
भारतीय स्वराज के संविधान में किन सुरक्षा प्रावधानों को समाविष्ट किया
जाना चाहिए, इस ओर मैंने आपका ध्यान दिलाया। अब मैं साइमन कमीशन द्वारा
अपने पक्ष में की गई सूचनाओं के बारे में बोलूंगा। संविधान के तहत दलित वर्ग की
सुरक्षा के बारे में साइमन कमीशन ने सहानुभूति से सोचा इस बारे में कोई आशंका
नहीं। किसी भी मायने में वह सूचनाएं पर्याप्त नहीं होने के बावजूद साइमन कमीशन
ने वास्तव स्थिति का चित्र खींचने की कोशिश की इसमें दो राय नहीं हो सकती।
हालांकि, उन्होंने केवल पाठशाला और पनघट पर जिन मुश्किलों से दलितों को
दो-चार होना पड़ता है, केवल उसी के बारे में सोचा है। इस दुर्भाग्यशाली वंचित
वर्ग को समाज में रहते हुए जिन यातनाओं का सामना करना पड़ता है उनमें से
यह केवल एक छोटा-सा हिस्सा है। इसके बावजूद मोंटफोर्ड कमीशन की तुलना
में साइमन कमीशन ने दलितों को संविधान प्रदŸा सुरक्षा का प्रावधान दिए जाने का
महत्व बेहतर तरीके से जाना यह बात माननी ही पड़ेगी। हालांकि अत्यंत खेदपूर्वक
कहना पड़ रहा है कि हमारे प्रतिनिधियों की संख्या और पद्धतियों के बारे में साइमन
कमीशन की सिफारिशें अत्ंयत निराशाजनक हैं।
आप जानते ही हैं कि आजकल दलित वर्ग के प्रतिनिधियों को मनोनीत कर
लिया जाता है। संसद में आपका प्रतिनिधित्व करने की मुसीबत जिन्हें झेलनी पड़ती
हैं वे आपको इस तरह मनोनीत करने की पद्धति में क्या खामियां हैं, यह बता सकते
हैं। और मुझे खुशी है कि साइमन कमीशन के सामने हमारे सभी लोगों ने इस बात
की निंदा की। अपने प्रतिनिधित्व के लिए बेहतर प्रतिनिधि चुनने का अधिकार इस
पद्धति द्वारा हमसे छीन लिया जाता है। नियुक्त किए गए प्रतिनिधियों को आचरण की