1. जन्म आधारित श्रेष्ठता और पवित्रता के कारण गुणहीन ब्राह्मणों का भी कल्याण हुआ है - 21 और 22 मार्च 1920 माणगांव - Page 22

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डिप्टी असिस्टंट, डिप्टी एज्युकेशनल इन्स्पेक्टर उनका हित चाहने वाले होने चाहिए। चूंकि अन्य वर्गों के लोग बहिष्कृत वर्ग की शिक्षा के प्रति उपेक्षा या अनुदारता दिखाते हैं इसलिए उपरोक्त अधिकारियों में बहिष्कृत वर्ग के लोग होने चाहिए। परिषद् की राय है कि बहिष्कृत वर्ग के शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए सरकार विशेष सुविधा देकर उनकी नियुक्ति करे। परिषद् की यह राय है कि बहिष्कृत वर्ग में शिक्षा के प्रसार के लिए हर जिले में कम से कम एक डिप्युटी या असिस्टंट एज्युकेशनल इंस्ट्रक्टर बहिष्कृत वर्ग का हो और इस पद के लिए ट्रेनिंग कॉलेज से थर्ड इयर पास या मैट्रिक पास व्यक्ति को योग्य समझा जाए।

  1. यह परिषद विशेष रूप से यह मांग करती है कि जिस तरह अंग्रेजों

द्वारा शासित रियासतों में मुसलमानों को और मैसूर राज्य में गैर ब्राह्मण

और बहिष्कृत वर्ग के छात्रों को माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त

छात्रवृŸायां दी जाती हैं उसी तरह ब्रिटिश शासित रियासतों में बहिष्कृत

वर्ग के छात्रों को छात्रवृŸायां मिलनी चाहिए।

  1. इस परिषद का मत है कि सभी जगह स्पृश्य और अस्पृश्यों के विद्यालय

एक ही होने चाहिएं।

  1. बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इन दिनों महारों की वतनदारी

की स्थिति बहुत खराब है। इस परिषद को ऐसा लगता है कि स्थिति

खराब होने के दो कारण हैं -

(क) महार वतनदारों को मृत पशुओं को ठिकाने लगाने जैसे कई गंदे

काम करने पड़ते हैं इसलिए उनकी वतनदारी को निकृष्ट माना

जाता है।

(ख) वतनदारों की वतनी जमीन हर पीढ़ी में बंटती जा रही है। हर पीढ़ी

में बंटती जाने के कारण जमीन के टुकडे इतने छोटे हो गए हैं कि

हर महार वतनदार को पर्याप्त फसल न हो पाने के कारण उनकी

स्थिति कंगाल होती जा रही है इसलिए इस परिषद की दृढ़ राय

है कि वतन पद्धति में परिवर्तन करना बहुत जरूरी है।

महार के वतन को सभी महारों में बराबर बांट कर सभी को दरिद्र और कंगाल बनाने से अच्छा है कि उस वतन को थोडे़ से लोगों में बांट कर उनकी स्थिति को सुखद सम्मानजनक बनाया जाए। इसलिए महारों के वतन की जमीन को चुनिंदा महारों में बडे़ पैमाने पर बांटने से जिन महारों को इस जमीन विभाजन के कारण अपनी वतनी जमीन से हाथ धोना पडे़गा उन्हें जहां संभव हो वहां जमीन देकर